मेरा ये ब्लॉग मेरे मन के कोमल उद्गारों से विरचित है , आप सब इस पर सादर आमंत्रित हैं , अगर कोई सलाह देना चाहें तो कृतार्थ करें , आपका साथी अनिल आर्य...
Monday, 13 September 2021
Friday, 3 September 2021
गुरूजी
मैं अनिल आर्य अपनी यह कविता अपने सभी शिक्षकों को समर्पित करता हूँ। वास्तव में शिक्षक ही हमारे व्यक्तित्व व भविष्य का निर्माता है, अपने विचारों को एक कविता का रूप देने की कोशिश की है, हालांकि गुरूजी की महिमा का वर्णन कर सकने की सामर्थ्य लायक शब्द किसी भी भाषा के शब्दकोष में नहीं हैं। गुरू का व्यक्तित्व इतना विराट है कि वह शब्दों की सीमा से परे भावना की परिधि में आता है।
गुरूजी
हम पढ़ें लिखें और बनें महान,
गुरूजी बालक हम नादान,
आप के बिन न मिलता ज्ञान,
गुरूजी हमारे गुणों की खान,
करना सिखाते सब का सम्मान,
गुरूजी भरते ज्ञान की झोली,
सिखाते बोलना मीठी बोली,
हम हैं बूँद गुरूजी सागर,
गुरूजी भरते ज्ञान की गागर,
जो गुरूजी की कृपा होती,
हम बालक बन जाते मोती,
गुरूजी हैं परमात्मा का रूप,
हम पौधे गुरूजी हैं धूप,
गुरूजी के दर्शन मिल जाते,
हम बालक फूल से खिल जाते,
मन की शंका का करते समाधान,
गुरूजी हमारे कृपा-निधान,
पाते गुरूजी के हाथों की थाप,
व्यक्तित्व नहीं बनता अपने आप,
डांटते गुरूजी कभी -कभार,
उससे भी होता है उद्धार,
हमें पढ़ाते और लिखाते,
गुरूजी सभ्य समाज बनाते,
गुरूजी माफ़ करते हमारी हर भूल,
गुरूजी प्रभु हम चरणों की धूल,
गुरूजी आपने हमारे दिव्य चक्षु खोले,
शब्द नहीं बने जो आपकी महत्ता बोलें,
अब वाणी को हम देते हैं विराम,
गुरूजी हमारे विष्णु गुरूजी हमारे राम।
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