Friday, 31 October 2025

🌸 “पारस — उजियारा जीवन का” 🌸

🌸 “पारस — उजियारा जीवन का” 🌸

जन्म दिवस है पारस तेरा — हरियाणा दिवस का सवेरा,
सूरज ने मुस्कान बिखेरी — दूर हुआ गहन अंधेरा।
तेरे आने से जैसे घर में — चाँद उतर के आया,
हर दिल में तूने बसाया — स्नेह, और भरोसा-छाया।

पिता रणधीर सिँह की छाया — अब भी तेरे संग चलती है,
उनकी मर्यादा, सच्चाई — तेरे स्वर में पलती है।
माँ बाला के आँचल ने तुझमें — प्रेम का दीप जलाया,
उनकी आँखों की दुआओं ने — तेरा पथ आलोकित करवाया।

स्नेहप्रीत तेरी जीवन-संगिनी — मृदुल वाणी, कोमल, सुशील
उसके संग तेरा जीवन — मधुर, सुकून, मुस्कानों की झील,
अभिमन्यु तेरा उजला स्वप्न — तेरे स्वरूप की पहचान,
तेरे संस्कारों से सीखे — सच्चाई और बड़ों का करे सम्मान।

रजनी-मोनिका बहनें तेरी — स्नेह की दो धारा,
उनके हृदय में बसता तुझसे — अपनापन सारा।
तेरा मन निर्मल, वाणी मधुर — जैसे गंगा की धार,
हर जन में देखे अच्छाई — यही तेरा उपहार।

हरियाणा की मिट्टी जैसा — सच्चा, सरल, प्रखर,
वैसा ही तू पारस प्यारे — उजला, ओजस्वी स्वर।
तेरी राहें रहें सुगंधित — मन में रहे उजास,
जीवन बने उदाहरण ऐसा — जैसा होता अटूट विश्वास।

🎉 जन्मदिन मुबारक पारस!
तेरे नाम की महक रहे — हर हृदय के पास,
जीवन में तू नाम करे - मिले तुझे हर मिठास।🌼

Wednesday, 29 October 2025

💐"प्रवीण — मेरे यार का नाम" 💐

"प्रवीण — मेरे यार का नाम" 

वक़्त की धूल जब आँखों में उतर आई थी,
तब तू आया — और दुनिया फिर मुस्कराई थी।
तेरी बातें, जैसे कोई उजली दुआ हो,
तेरी सोच, जैसे खुदा की लिखी रज़ा हो। 🌿

न तू मुखौटों में ढला, न किसी रंग में सजा,
तेरे मन की सादगी ही तेरा सबसे बड़ा मज़ा।
तेरी दोस्ती वो दीप है जो आँधियों में भी जले,
तेरे जैसा दोस्त मिले, तो ग़म भी फूलों-सा लगे। 🌸

हमने देखे कई मौसम, कई चेहरे, कई साल,
पर तेरे संग बिताया हर पल लगा कमाल।
न कोई स्वार्थ, न कोई गिनती, न कोई हिसाब,
बस अपनापन — यही तेरी पहचान, यही जवाब। 🌻

तेरी बातों में ठहराव, तेरे स्वभाव में नर्म धूप,
तेरे जैसा साथ हो तो जीवन का निखरे स्वरूप।
तेरी हँसी में उजियारा, तेरे शब्दों में मिठास,
तेरी यादों से महके हर सुबह, मेरी हर साँस। 🌼

आज तेरे जन्मदिन पर दिल से यही दुआ,
तेरा हर दिन खिले जैसे खिला कमल का रूप
तेरे कर्मों की खुशबू यूँ ही फैलती जाए,
और दोस्ती का ये रिश्ता युगों - युगों मुस्काए। 🌹

तू सखा नहीं, भाई है, सौभाग्य है,
तेरे नाम में अपनापन, तेरे मन में त्याग है, वैराग्य है,
प्रवीण, तू वो अध्याय है जो हर दिल को सुहाना बनाता है,
अनिल के जीवन में तू — प्रेम और विश्वास कहलाता है। ✨


सप्रेम : अनिल आर्य...

🌟 “महिमा – महात्मय की महारानी” 🌟

🌟 “महिमा – महात्मय की महारानी” 🌟

महिमा, तू नाम नहीं, एक सुरभित एहसास है,
तेरी मुस्कान में अपनापन, तेरी नज़रों में विश्वास है।
घर का हर कोना तेरी करुणा से महकता है,
तेरे आने से हर दिन बसंत बन चमकता है।

तेरे शब्दों में ममता, तेरी आँखों में उजियारा,
तेरी दृढ़ता में दिखता है शक्ति का सहारा।
तेरे स्पर्श से खिल उठती समाहिता की हर सांस है,
तेरे आँचल में ही सजग को मिलता ममत्व का अहसास है।

तू वो धड़कन जो उनके जीवन में राग भर दे,
तेरे होने से हर पल जीवंत स्वर सा लगे।
तेरे बिना हर सुर भटकता, हर राग खो जाए,
तेरे संग ही संगीत को जीवन मिल पाए।

तेरे संग जगविन्दर का जीवन एक गान बने,
हर कठिन राह तेरे प्रेम से आसान बने।
तू वो दीपक है जो आँधियों में भी जलती रही,
थककर भी सबको राह दिखाती चलती रही।

🎂💐 जन्मदिवस नहीं, यह तेरे होने का उत्सव है,
महिमा — तू स्नेह, साहस और सौन्दर्य का स्वर है।💐🎂

🔥✨ सादर शुभकामनाएँ —
वीर जगविन्दर की संगिनी,
जीवन की मधुर प्रेरणा — महिमा! ✨🔥


सप्रेम : अनिल आर्य ---

Monday, 27 October 2025

My Mother

          🌸 My Mother 🌸
( Dedicated to my mother)

My mother is my shining sun,
She smiles and makes my worries run.
Her hug is warm, her heart so kind,
A better friend I’ll never find.
She wakes me up and makes my day,
With love and care in every way.
Her voice is soft like gentle rain,
She feels my joy, she feels my pain.
For all she does, I thank her true,
Mom, my world begins with you.

From Anira Anil arya...

Thursday, 23 October 2025

🌸 भाई दूज का स्नेह गीत 🌸

🌸 भाई दूज का स्नेह गीत 🌸

आज सजे हैं फूल द्वारे, दीप जले हर ओर,
बहना के मन में उमड़ रहा, स्नेह अपार पुरजोर।
थाली में आरती सजी है, रोली - चावल साथ,
नेत्रों में आशीष झिलमिल, अधरों पर सौगात॥

छुटकी की छिटपुट शरारतें, चंचल नयन स्नेह,
बोल में मिठास भरी है, जैसे फागुन मेह।
भाई निहारे स्नेह - दृष्टि, मन हो जाए निहाल,
जैसे पिता का हृदय उमडता, पा कर स्नेह अपार॥

भागी फिरती - पायल बजती, सुख का आता भाव,
उसके पावन पैरों छनके, हर घर आँगन - गाँव।
थाली सजे आराधन से, दीपक झलके साथ,
छोटी बहन के निर्मल मन में, बसता स्नेह-प्रभात॥

भाई आया हँसता-खिलता, मन में भाव अनूप,
बचपन जैसे लौट पड़ा हो, गलियों में लेते सर्दी-धूप।
माँ की गोदी, हँसी पुरानी, यादों का संसार,
बड़ी बहन के आँचल में छिपकर, पा ले माँ-सा प्यार॥

बडकी बोले – “सुखी रहो तुम, पथ में हो उजियार,”
भाई कहे – “तेरे आशीष से, जीवन हो साकार।”
क्षणभर को थम जाए समय, बोले मन बिन-बोल,
इस बंधन में लिपटा रहता, प्रेम अमर अनमोल॥

कहे अनिल आर्य प्रेम यही है, स्नेह यही उपहार,
भाई दूज का यह उत्सव है, जीवन का त्योहार।
जहाँ न द्वेष, न दूरी कोई, बस ममता की रीत,
बहन-भाई के इस स्नेह का, गूँजे मधुर संगीत॥

अनिल आर्य...

Wednesday, 22 October 2025

नन्हे 'शिवा' के नाम

🌸 नन्हे शिवा के नाम 🌸

आया है घर में नया जीवन,
इतना कोमल कि हवा भी ठहर जाए।
नन्हा शिवा —
तेरी साँसों में जैसे किसी प्रार्थना की सुगंध घुली है।

माँ-जी की आँखों में
अब हर सुबह तेरी मुस्कान उतर आती है,
उनके हाथों की लोरी में
सदियों की ममता गूँजती है।

दादा तुझे देखते हैं
तो उनके चेहरे पर समय रुक जाता है।
वे कहते हैं —
“यह तो मेरे आँगन का पुनर्जन्म है।”

बुआ तेरा माथा सहलाती हैं,
जैसे अपने बचपन को फिर से पा लिया हो।
चाचा तेरे रोने में हँसी ढूँढ लेते हैं,
कहते हैं — “यह तो घर की सबसे प्यारी आवाज़ है।”

परी और पावनी —
तेरे संग दो रंगों-सी खिलती हैं।
परी बड़ी है, समझदार, शांत।
दूर से देखती है तुझे अपलक,
जैसे किसी चमत्कार को।
उसकी आँखों में अचरज भी है, स्नेह भी।

पावनी छोटी है, चंचल,
हर पल चाहती है रहना तेरे पास।
गोद में लेना, दुलारना, सुलाना —
तेरे हाथ को थामे रखना ही उसकी दुनिया है।
उसकी हँसी और तेरी किलकारी
एक ही सुर में घुल जाती हैं।

माता रजनी —
अपने नाम को करती सार्थक।
रातों को जागती, निहारती, दुलारती,
तेरे हर स्पर्श को महसूस करती,
अपनी ममता के अमृत से सिंचती है।

पिता अनिल —
तेरे संग बन जाते और भी चंचल।
समय उनके लिए ठहरता नहीं,
वे हर पल तुझे निहारते हैं,
थकते नहीं, बस मुस्कुराते हैं।
उनकी आँखों में इच्छा है —
कि करो नाम रोशन परिवार का,
कि तुझमें गहराए आर्यत्व का गुण,
बनो तुम भी श्रेष्ठ, निर्मल और उज्ज्वल।
 

तू सोता है
तो पूरा घर धीरे बोलता है,
तू जागता है
तो दीवारें भी मुस्कुराने लगती हैं।

शिवा —
तेरा नाम ही शांति है,
तेरा आना ही आशीष,
और तेरे साथ
यह घर हो गया है और भी पूर्ण,
एक-दम परिपूर्ण। 

अनिल आर्य...

Tuesday, 21 October 2025

छठ मइया की अरज

🌅 छठ मइया की अरज 🌅

(कवि – अनिल आर्य)

उषा की लालिमा फूटे, अरुण किरण मुस्काय,
नदिया के जल में झुकती, आस्था सिर झुकाय।
साँझ-सवेरे घाट सजे हैं, गीत गगन तक जाएँ,
छठ मइया की महिमा गाए, सुर भरे सिरमौर गाएँ॥

करवों में अर्घ्य सजे हैं, सिंधूरित हर माँग,
सूरजदेव के स्वागत में, गूँजे मंगल राग।
सात दिनों का संयम जैसे, तप बन जाए प्राण,
हर अर्घ्य में कृतज्ञ हृदय का, झलके सौर सम्मान॥

काँस के पत्ते, गन्ने की छाँव, टोकरी में फल,
धरती, जल, अंबर, अग्नि, वायु — सबमें छिपा संबल।
माटी की गंध, लोक की बोली, स्नेह की सौगात,
छठ है जीवन का उत्सव, श्रद्धा का परिपाठ॥

भोर की बेला आए जब, उगे अरुण-प्रभु लाल,
नारी हाथ जोड़े कहती — “रखियो कुल सँभाल।”
मन में होती मौन प्रार्थना, नयनों में प्रकाश,
सूर्यदेव दें शक्ति-संतति, सुख-समृद्धि-विलास॥

कहे अनिल आर्य सुनो जगत ये, सत्य सनातन वाक्,
आस्था की थाती है यह, श्रम का यही पराक्।
छठ न केवल पर्व भक्ति का — जीवन का उत्साह,
जहाँ श्रम में तप, तप में प्रेम, प्रेम बने इतिहास॥

अनिल आर्य...

🌿 गोवर्धन-गौरव गान 🌿

🌿 गोवर्धन-गौरव गान 🌿

ब्रजभूमि की वह पावन वेला, हरित धरा मुस्काय,
इन्द्र-दर्प दलन हेतु स्वयं, नन्दलाल सुत आय।
कर-कमलों पर गोवर्धन धारण, शैल-शिखर सिरताज,
बालक रूप में ब्रह्म प्रकटे, मानवता का राज॥

वृषभानु-सुता हर्ष भरे, गोकुल गावे गीत,
गोप-गोपिका संग आनंदित, प्रकृति प्रकटे प्रतीत।
वृष्टि-विलय का यह उत्सव, श्रद्धा का आधार,
इन्द्रजाल पर विजय प्रतीक, सन्मार्ग का प्रचार॥

अन्नकूट से भरे पात्र सब, कृतज्ञता का भाव,
अन्नपूर्णा-कृपा से पोषित, जीवन पावे प्रभाव।
धरित्री के प्रति आभार का, यह शुद्ध प्रतीक महान,
हर अन्नकण में ईश्वर दीखे, हर अर्पण में सम्मान॥

प्रकृति-प्रेम का गान यही, हर हृदय में ध्वनित हो,
धर्म, दया और करुणा का, दीप सदैव प्रज्वलित हो।
इस भाव-पर्व के स्वर में गूँजे, आर्य-वाणी अपरिहार्य —
"गोवर्धन है जीवन-उत्थान", कहे कवि अनिल आर्य॥

गोवर्धन-पूजा के अंतर में, छिपा यही संदेश —
मानव-सेवा, प्रकृति-रक्षण, धर्म न तजना देश।
अहम्-त्याग कर प्रेम-पथिक बन, धर सजग मन ध्यान,
‘गोवर्धन’ है उत्थान प्रतीक, श्रद्धा का अभिनन्दन गान॥

अनिल आर्य...

Monday, 20 October 2025

🌺 दीपावली : जन-जन का मंगल पर्व 🌺

ज्योत्स्ना सी झिलमिलाती यह अमावस की रात,
अंधकार से जूझता हर दीपक बन जाता प्रभात।
घृत-बाती की लौ में जब श्रद्धा का संगम होता,
मानव मन का हर कोना तब उजियारा होता।

मिटा तमस, जग में फैले शुभ्र ज्योति का सन्देश,
हर हृदय में जग उठे सत्‌ता, प्रेम, धर्म, उपदेश।
राम लौटे जब अयोध्या, आनन्द उमड़ पड़ा था,
धरती ने दीप सजाए, नभ ने मंगल गा था।

तब से हर वर्ष मनाता भारत यह पर्व महान,
संकल्प, श्रद्धा, स्वच्छता, स्नेह जहाँ के प्राण।
लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती की पूजन में रमता भाव,
कर्म, विद्या, समृद्धि से सजता जीवन गाँव-गाँव।

कण-कण में संस्कृति झलके, दीपों की यह पंक्ति,
संघटन का सन्देश लिए जलती है अविराम शक्ति।
हर जन के जीवन में फैले सुख-शान्ति का उजियार,
हो प्रेम, दया, करुणा का जग में सदा विस्तार।

जन-जन का मंगल गान गूँजे नभ के पार,
हर हृदय बने मंदिर-सा, हर घर हो उत्सार।
हर आत्मा में दीप जले सद्‌गुण की ज्योति महान,
सर्वमंगलाय शुभं भवतु — यही भारत की पहचान।

🌼 शुभकामना-पहरा : 🌼
हे पाठक! तेरे जीवन में दीपक-सा उजास रहे,
हर दिन तेरा त्यौहार बने, हर क्षण विश्वास रहे।
सफलता तेरे संग चले, समृद्धि तेरे द्वार सजे,
स्नेह-सुगन्धि बिखेरता, तेरा जीवन दीप जले।

॥ शुभ दीपावली, सर्वे भवन्तु सुखिनः ॥

अनिल आर्य 

Friday, 17 October 2025

💥 “शक्ति – नाम ही जिसकी पहचान है” 💥

💥 “शक्ति – नाम ही जिसकी पहचान है” 💥

शक्ति जीजा जी, आप वो तूफ़ान हैं,
जो रुकावटों को तोड़, खुद नई उड़ान हैं।
आपकी बातों में जोश, निगाहों में नूर है,
आप जैसा व्यक्तित्व वाक़ई भरपूर है।

आपके कदम जहाँ पड़ते हैं, राहें खुद सँवर जाती हैं,
आपकी मौजूदगी से महफ़िलें निखर जाती हैं।
संघर्ष को जिसने हँसकर गले लगाया,
उसका नाम ही ‘शक्ति’ कहलाया!

आज का दिन लाया है खुशियों की बहार,
आपके जीवन में हो सुखों की कतार।
हर सुबह बने नई उम्मीद का आग़ाज़,
हर शाम दे सफलता का अंदाज़।

🔥🌟
जन्मदिन मुबारक हो, शक्ति जीजा जी!
आपकी ऊर्जा, आपका जज़्बा – यही हमारी प्रेरणा है!
🌟🔥

🌟 “जगविन्दर – जीवन का योद्धा” 🌟

🌟 “जगविन्दर – जीवन का योद्धा” 🌟

जगविन्दर, तू नाम नहीं, एक पहचान है,
तेरी हँसी में जोश है, तेरी आँखों में उड़ान है।
हर मुश्किल को मुस्कुरा के तू हराता है,
ज़मीन पर चलते-चलते आसमान छू जाता है।

तेरे कदमों से गूंजती है जीत की गाथा,
तेरे संग हर दिल को मिलती है परिभाषा।
दोस्ती तेरी आग है, जो ठंडे लहू में जान भर दे,
तेरे जज़्बे की लपट, हर सर्द दिल को गर्म कर दे।

जन्मदिन आज तेरी जीत का पर्व बने,
हर ख्वाहिश तेरी हक़ीक़त का स्वर बने।
तू चमके यूँ जैसे सूरज सवेरा करे,
हर साल तेरा नाम जमाना से दूर अंधेरा करे।

🎂🔥 जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ,
वीरता के प्रतीक – मेरे मित्र जगविन्दर! 🔥🎂