Wednesday, 30 April 2014

मेरे अजीज

हम
नहीं चुन सकते
वो
जो करें
मुहब्बत हमसे,
दे सकें
दो पल की
खुशियाँ,
कम से कम
चुनाव
हाथ है उनका,
जो करें
तिज़ारत,
या तो वो
जिनके लिए
तकलीफ़ सहने में
हमें
तकलीफ़ न हो…
मैंने
चुन लिये
अपने लिये
कुछ अज़ीज,
हैरानी होती नहीं
चोट खाकर
उनके हाथों…
उनके हाथ
पत्थर की जगह
फूल देखकर
बैचैनी जरूर होती है
सोचता हूँ
आज
चोट पड़ेगी
कलेजे पर,
पर फिक्र कैसी
वो भी तो उन्ही का है…


अनिल आर्य… 

सुलगने का मज़ा

मेरी चाहतों का
          अजब सिलसिला है
तेरी रुख़सतों में
           मज़ा जो मिला है
अन्दाज 'अनिल' अब
            संभाले न संभलें
उठने में नहीं
            जो गिरने का मज़ा है
इश्क़ में आशिक़
            मरे तो मरे फ़िर
जो जीता है उसको
            कौन पूछता है ???
है जान हाज़िर
             आज ही क़त्ल कर दो
ज़िंदा हूँ लेकिन
              ज़िंदगी से ग़िला है
गौरमतलब मुहब्बत
             है तेरी कहानी
जो जितना बुझा है
             वो उतना जला है
मैंने बुझ के जाना
            जलने में नहीं कुछ
सुलगने में है जो
             वो असली मज़ा है....


 अनिल आर्य…

Tuesday, 29 April 2014

तांडव का लास्य

दो कांच के टुकड़े
हैं छुपाते
मेरी लाल सुर्ख आँखें
सच तो ये है
की आँखों में ये सुर्खी
सुर्खी नहीं
उबलता लहू है
कहीं बह न निकले
जला दे जमाना
ये अजस्त्र लावा - ज्वाल
क्यों जमता नहीं है ???
है तोड़ा - मरोड़ा
झँझोड़ा भी खुद को
ये तांडव का लास्य
बदलता नहीं  है …


अनिल आर्य… 

थोड़ी सी ग़ैरत / बची थी / लुटा दी

नींद नहीं आती
तेरी बेरुखी से
तड़पने को छोड़ा
बस मारा नहीं है

जीने की चाहत
मेरी बहुत है
बस जीने के लायक
जहां चाहिये है

ज़माने ने समझा नहीं
इसलिए किया सब
तुम जानती थी
फिर भला क्यों ऐसा ???

थोड़ी सी ग़ैरत
बची थी
लुटा दी ,
क्या अब ऐसा
जिस पर
फक्र हो ???

रब के कुफ्र से
शिकायत भला क्यों ???
तुम तो थी अपनी
तुम्हारा कुफ्र झेला....

शिकायत नहीं तुमसे
नहीं कोई गिला है
जिसकी जो किस्मत
उसको मिला है…

बस थोड़ी हिम्मत कर के
और थोड़ी हद कर दो
मेरी हद खत्म फ़िर
फिर
मेरा सिलसिला है…

अनिल आर्य …

दो मीठे बोल प्यार के ग़र दे सको तुम...

दे दिया करो
दो मीठे बोल प्यार के
ग़र दे सको तुम,
ये सैद्धांतिक तल्ख़ भाषण
रहने ही दो कृपा हो,
उपदेश आजकल
खलते बहुत हैँ…
'आस्था' से आस्था
डगमगा सी गयी है ,
बस थोड़ा प्यार माँगा था
नहीं देना तो मत दो,
रूखा अन्दाज इतना
हुई कौन सी खता है ???

अनिल आर्य.... 

Bhikhri zindgi

Motiyon ki mala
Bhikri padi ho jaise,
Yun bikhar si gayi hai
Kuch zindgi hamari....
Koi samate to kah dun
Na baandho mujhe tum,
Ab bandhan main mera dum
Ghutne sa laga hai...

Anil Aarya...

Monday, 28 April 2014

कैसी ये तेरी बंदगी है....

ख़ामोश लबों पर है 
बेजुबां हकीक़त 
बेतरतीब सी बिखरी है  
बेइन्तिहाँ मुहब्बत.... 
और 
हक़कीत को खोल के 
बताया नहीं जाता 
ये इश्क़ ओ मुश्क़ है 'अनिल'
छुपाया नहीं  जाता.... 
और
ये इश्क़ ही बंदगी 
ये इश्क़ ही खुदा है 
और अपनी खुदाई 
इस जग से जुदा है.... 
हमारा 
जीना भी लाज़मी है 
और ये टुकड़ों कि जिंदगी है 
खुदा जो ठुकरा दे बन्दे 
तो कैसी ये तेरी बंदगी है.... 


 अनिल आर्य… 

Sunday, 27 April 2014

चैन से जी लेने दो....

विश्वास दिला कर 
अक्सर 
विश्वास 
हिला देते हैं लोग 
हर बार 
इक नया 
अपमान का घूँट 
पिला देते हैं लोग.... 

कवच गया 
कुण्डल गया 
ये सब 
कर्ण कि थाती है 
अच्छा जी, 
तिक्त शब्दरूप 
विष भी पीना है 
अभी महादेव भी बाकी है.... 

अरे 
मधुरतम जीवन 
के इस 
प्राँगण में 
यौवन के सुखतम से 
क्षण में 
अपने प्राणों 
के इस 
प्रण में 
जीवन के छोटे से 
रण में 
मुझे घाव सी लेने दो 
जीने का है 
शौक मुझे भी 
ज़रा
 चैन से जी लेने दो.... 


अनिल आर्य.... 

Saturday, 26 April 2014

विश्वशक्ति का ध्वज तिरंगा

विजय-भेरी का मैं रण बांकुरा 
रण-भेरी से कभी डरा नहीं 
चारों और से मौत थी झपटी 
दुश्मन के हाथों मरा नहीं.... 

विजय-दम्भ में डूब कभी मैं 
आतप से उतराया ना 
दुश्मन भी जो झुका कभी तो 
उस पर खड़ग उठाया ना.... 

सौगन्ध मुझे इस मिट्टी कि 
इस मिट्टी में ही मिला दूँगा 
भारत का वीर सिपाही हूँ 
प्रलय तक को धूल चटा दूँगा.... 

जो मेरे भारत पर वार किया 
तो केसरिया कर जाऊँगा 
क्या मौत कि औक़ात है जो 
तुझे मारे बिन मर जाऊँगा.... 

विश्वशक्ति का ध्वज तिरंगा
नव-परिवर्तन कर जाएगा 
होगा शांति-संधान जगत में 
तिरंगा शान से लहराएगा.... 


अनिल आर्य....

Friday, 25 April 2014

जाग मुसाफिर; अब रैन भुला


महासमर अनश्वर में 
 प्राणों की पीड़ा मत ढूँढो 
प्यार की अभिव्यक्ति में
      स्वप्न कि क्रीड़ा मत ढूँढो… 

 ढूँढने से कुछ नहीं मिलेगा 
खो जाओगे तो पाएगा
तैरोगे तो डूबोगे 
      जो डूबोगे उतरायेगा… 



खो जाओ तुम प्रेम भँवर में 
खोना-पाना सब भूल-भुला 
 मत सोचो क्या हासिल मुझको
     सब खोया लेकिन कुछ नहीं मिला… 

खोना-पाना तो क़िस्मत है 
रोने से हासिल क्या होगा ?
जाग मुसाफिर; अब रैन भुला 
   सोने से हासिल क्या होगा ???

   अनिल आर्य…

Thursday, 17 April 2014

मुक़म्मल

मुक़म्मल होने की चाहत में
दिन-रात भुला बैठा
और मुक़म्मल हुआ
तो पाया
कि इस आधे-अधूरे जहां में
कोई मुक़म्मल नहीं होता....


जो दिखते हैं मुक़म्मल
है नक़ाब उनके चेहरे
उनकी हकीक़त जाकर
उनके आइनों से पूछो....
उनकी आँखों मैं झांककर देखो
रूह का चैन नहीं मिलता
कि इस आधे-अधूरे जहां में
कोई मुक़म्मल नहीं होता....


अनिल आर्य…

मुनासिब नही होता....

अरे, ओ आसमां वालो !
जमीं न छोड़ देना तुम....  
पैरों की कीमत पर 
पंखों मैं उड़ान भरना 
मुमकिन तो होता है 
पर मुनासिब नही होता.... 
अनिल आर्य.... 

ये मूर्ख जमाना कहता है , मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ…

मैं खुद में खोया रहता हूँ
खुद की ही बातें करता हूँ
और ये मूर्ख जमाना कहता है
मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ…

किसी की मुझे परवाह नहीं
किसी का भी होने से, मैं डरता हूँ
और ये मूर्ख जमाना कहता है
मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ…

आहों की महफ़िल से बस मेरी यारी है
और मैं निपट-अकेले रमता हूँ
और ये मूर्ख जमाना कहता है
मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ…


वैसे मेरी खुद की कोई ख़ास औकात नहीं
मुझ पत्थर में तेरे जैसे शुद्ध-देसी ज़ज्बात नहीं
लेकिन फिर भी मैं खुद का हीरो,
खुद की बहुत इज्जत करता हूँ
और ये मूर्ख जमाना कहता है
मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ…



किसी के ज़ज्बातों की कोई चाहत नहीं
कौन कहता है मुझे खुद से मोहब्बत नहीं
मैं खुद पर मरता हूँ
जज्बाती होने से बस डरता हूँ
और ये मूर्ख जमाना कहता है
मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ…

                 अनिल आर्य....





अमर - समर

मेरे विधाता 
क्यूँ 
विरुद्ध विधि के मेरी 
  मेरा समर है ?

सुन वज्र ह्रदयी 
न हारूँगा 
आयुर्बल मेरा 
अमर है… 

थका हूँ 
पर हारा नहीं हूँ,
बदक़िस्मत सही 
     बेचारा नहीं हूँ.… 

लगन का धनी हूँ 
हूँ पक्का अपनी जुबान का,
कभी तो कहीं मिलूंगा तुमसे
ये वादा रहा आज 
    जमीन से आसमान का....

मेरा अमर - समर 
मुझसे ही चलता है 
देखता हूँ 
कब तक मेरा विधाता 
   मुझको ही छलता है… 

अनिल अपार साहस
 जीत की परिभाषा है,
जीतूँगा एक दिन 
मुझको खुद से 
   आशा है....

     अनिल आर्य.... 




Wednesday, 16 April 2014

कुंदन

जीवन की ज्वाला मैं अकसर
         तपकर ही कुंदन होते हैं,
जो धू - धू  कर के जलते हैं 
        वो स्वयं प्रकाशित होते हैं.… 
सूरज खुद से चमकते हैं 
        चंदा प्रकाश को ढ़ोते हैं,
ग्रह परिक्रमा करते हैं
          तब खुद परिक्रमित होते हैं....


         

 अनिल आर्य.... 

Monday, 14 April 2014

प्यास

जो मेरी प्यास 
बुझ गई होती ,
तो ये जिंदगी भी 
कोई जिंदगी होती.... 

मैं मर जाऊँगा 
इस प्यास से ,
प्यास ये कुछ ख़ास है 
ख़ास ये एहसास है… 

इसके बुझने में 
मजा नहीं,
भड़कने में  कोई 
सजा नहीं ,
ये बुझ जाये 
ऐसी मेरी रज़ा  नही.... 

क्योंकि 
जो मेरी प्यास 
बुझ गई होती ,
तो ये जिंदगी भी 
कोई जिंदगी होती.... 

प्यास की क़ीमत 
आज प्यासा जानता है
कल कुंआ बतलाएगा ,
नहीं आया ग़र कोई प्यासा दर पे 
तो कुंआ सड़ जाएगा.... 

हर कोई जानता है 
कि  इतिहास खुद को 
दोहराता है,
कभी प्यासा कुंवे  के पास 
तो कभी कुंआ प्यासे के पास 
जाता है.... 

वक़्त के हाथों 
हर कोई मजबूर है,
कल कुंआ प्यासे से 
दूर था
और आज प्यासा कुँवें  से 
दूर है.... 



प्यासे ने मस्ती मैं झूम कर 
कुछ यूँ लिखा कि ,
जो मेरी प्यास 
बुझ गई होती ,
तो ये जिंदगी भी 
कोई जिंदगी होती.... 
ग़र बुझ जाती ये 
तो फिर क्या मेरी बंदगी होती ?
बिन बंदगी 
क्या मेरी जिंदगी होती…… 

न किसी का क़सूर ,
यही जिंदगी का दस्तूर 
कुंआ सड़ गया ,
प्यासा मर गया 
दोनों हारे,
जीता उनका गुरूर.... 

दोनों बेक़सूर 
हार कर भी 
विजय दम्भ मैं चूर 
क्या सच मैं दोनों बेक़सूर ???

                      अनिल आर्य…



मैं लाख सच बोलूंगा, तू मेरी एक न मानेगी....

मैं लाख सच बोलूँ,
मेरी एक न मानेगी....
और वो एक झूठ बोलेगा,
उसे सराबोर कर देगा…

ये जाट सोया शेर है ,
इसे ज्यादा न छेड़ो तुम,
ये जो जाग जायेगा
तो बस आर-पार कर देगा…


हार-जीत का
इसे मोल भाव नहीं आता ,
ये रोहतक का मौलड़ जाट
किसे की सौड़ सी भर देगा…



जब तक तू जानेगी
'अनिल' तीन-तेरह कर देगा…
और फिर मैं लाख सच बोलूंगा,
तू मेरी एक न मानेगी....
और वो एक झूठ बोलेगा,
तुझे सराबोर कर देगा…

                 अनिल आर्य… 

हाँ मेरे जैसे मुझको कल मिलेंगे

मेरी उमर में
उठाया हो दोस्ती में
नुकसान इतना....
इतने कम मिलेंगे....
और जितने भी मिलेंगे ,
दुखी हरदम मिलेंगे....
अरे ! उनकी किस्मत होगी ऐसी
की हरदम बाँटेंगे
अपने हिस्से की खुशियाँ सबको,
बदले मैं
सबके हिस्से के गम मिलेंगे....
चल आज नहीं तो कल सही,
हाँ मेरे जैसे मुझको कल मिलेंगे....

                   अनिल आर्य… 

शिद्दत से चाहा था , शिद्दत से भुला देंगे ...

शिद्दत से चाहा था
शिद्दत से भुला देंगे 
अपने दिल की किताब से 
इश्क़ का हर अल्फ़ाज़ मिटा देंगे.... 

इश्क़ करने की 'अनिल'
तुझे ऐसी सजा देंगे 
तेरी हस्ती-औ-नाम परस्ती को 
मिटटी मैं मिला देंगे.... 

ए - जिगर तू रोएगा 
तू मुझसे फरियाद करेगा,
तेरे इश्क़ ओ माशूक़ को हम भुला देंगे,
तेरी बेपनाह मुहब्बत की 
बेशुमार दौलत को,
हम इस बेदर्द ज़माने पर 
बड़ी बेदर्दी से लूटा देंगे....



करने चला था इश्क़, साला !
सर का भूत भगा देंगे ,
मिट जाएगी या तो हस्ती तेरी,
या तेरा इश्क़ मिटा देंगे… 

चिंता न करना जान मेरी 
तेरा नाम दिल से भुला देंगे,
जान है जब तलक जान मैं 
हम पूरी जान लगा देंगे.... 

जितनी शिद्दत से चाहा था 
उतनी शिद्दत से भुला देंगे,
अपने दिल की किताब से 'अनिल'
इश्क़ का हर अल्फ़ाज़ मिटा देंगे…


अनिल आर्य…

ज़िद है....

खुद की  बनायी
हर सीमा के
पार जाने की ज़िद है,
खुद से जीत कर
खुद ही हार जाने की ज़िद है …

नाकाफ़ी हैं तेरी दोस्ती
मेरी हसरतों के लिए,
तुझे पूरा खोने की
या तो पूरा पाने की ज़िद है....

हर बार हारा
दोस्ती मैं जो सख्स,
प्यार मैं उसे
पार पाने  की ज़िद है....


आज आजमा लूँ तुम्हे भी
ऐ मेरे बदनसीब - नसीब ,
फ़लक तक जाकर, चाँद छुए बिन
लौट आने की ज़िद है....

तेरे खिलाफ़ लड़ना 
मुनासिब नहीं 'अनिल'
तुम्हे पाने की बजाय
भूल जाने की ज़िद है....


खुद की  बनायी
हर सीमा के
पार जाने की ज़िद है,
खुद से जीत कर
खुद ही हार जाने की ज़िद है….

                      This is future.... One day.... i will make it true... Anil Aarya.... अनिल आर्य 


Wednesday, 9 April 2014

Tere bol...

Meri rooh Tak ko
sansana deta hai
Tera ek bol...
Mujhe gunaah tak
Ka pata nahi
Bas tu saja bol...
Kar dun teen terah
Bas apni
Raja bol...
Main niche gir jaun ?
Jo upar uthne main
Tujhe aata ho maja bol ???

Tuesday, 8 April 2014

Sun le khuda

Janta hun tere andar ki
Jhank chuka
Gahrayi main,
Bahut khoobsurat
Dil hai tera,
Bas uspar naam
Nahi mera...
Na hi likh paunga kabhi,
Tere dil pe
Kharonch aa gayi to ???
Mar jaunga jeete ji,
Tujhpe kya beetegi ???

Ab jab jaan gaya
Sab kuch,
Jaan se jyada
Lagne lagi tu...
Tum layak nahi
Pata khud ko,
Maaf kar do mujhko...

Pyar
Beshumar karta hun,
Tum par
Pahle se jyada marta hun,
ISI liye
Tere paas aane se darta hun...

Dekh Lena aajma kar chahe
Paas nahi aa paogee,
Wahi de sakta tumhe,
Jo acha tumhare liye,
Mujhe khud se kam hi paogee...

Agar tumhe chahun,
Tumhare chahne se bhi
Tumhe na paun...
Samajh Lena pyar tha...

Tere kabil
Nahi main...
Na ho sakta kabhi....
Na pa sakta tumhe...
Na kho sakta kabhi....

Sunday, 6 April 2014

I Love me

Mujhe to
Ishq hai khud se
Ki khud main
Kho gayi hun main....
Mere har katre
Main chahat hai,
Ki khud ki
Ho gayi hun main...

Itni khud se
Mohabbat hai,
Ki main
Batla nahi sakti,
Itni shiddat se chahat hai
Ki main
Jatla nahi sakti....

Mera to pyar
Bas main hun,
Meri chahat
Mujhi se hai,
Agar kisi ke sath
Jannat ho,
Meri jannat
Mujhi se hai...

Main bahut
Toot jati hun,
Jab khud se
Rooth jati hun,
Jamane ki nahi parwah
Main khud pe
Aansu bahati hun...

Mana leti hun
Fir khud ko,
Main khud bin
Rah nahi pati....
Khud se doori
Jara si bhi
Main sah nahi pati...

Jamane ke diye
Jakhmon ko
Akele see nahi sakti,
Mujhe jarurat
Hai khud ki
Main khud bin
Jee nahi sakti...

Mujhe to naaj
Hai khud par
Mera andaaj
Anokha hai,
Akeli jeetun
Jamne ko
Itna khud par
Bharosa hai....

These lines r
Not a few lines only,
These r d Feelings of
A wonderful girl
With a suitable name
"Garima Arya"
Anil Aarya....

Khud se pyar hona chahiye...

रोज़ ख़ुद से मिलना चाहिए,  

ख़ुद पर ऐतबार होना चाहिए...  

ख़ुदी को करना हो बुलंद,  

ख़ुद से प्यार होना चाहिए...


मुझे ख़ुद से प्यार बहुत है,  

ख़ुद पर ऐतबार बहुत है,  

ज़माने की परवाह करूँ क्यों???  

मेरा व्यक्तित्व ज़माने को  

स्वीकार होना चाहिए...  

ख़ुदी को करना हो बुलंद,  

ख़ुद से प्यार होना चाहिए...


मैं केवल  

मैं नहीं हूँ,  

मेरे खुदा, तेरा वजूद  

मेरा आधार होना चाहिए...  

मेरा अपनापन  

बस मुझसे नहीं है,  

इस "मैं" में सारे जहां का  

विस्तार होना चाहिए,  

ख़ुदी को करना हो बुलंद,  

ख़ुद से प्यार होना चाहिए....


जीना 'ज़िंदगी' नहीं है  

जीने की चाहत  

पाने की ताक़त  

खोने का हौसला  

और खोकर सब फिर  

अपनेपन का अपने ही से  

व्यवहार होना चाहिए....  

ख़ुदी को करना हो बुलंद,  

ख़ुद से प्यार होना चाहिए....


– अनिल आर्य 2105

Roj khud se milna chahiye,
Khud par aitbaar hona chahiye...
Khudi ko karna ho buland,
Khud se pyar hona chahiye...

Mujhe khud se pyar bahut hai,
Khud par aitbaar bahut hai,
Jamane ki parwah Karun kyun???
Mara vyakititva jamane ko
swikar hona chahiye...
Khudi ko karna ho buland,
Khud se pyar hona chahiye...

Main keval
main nahi hun,
Mere khuda, tera vajood
Mera aadhar hona chahiye...
Mera apnapan
bas mujhse nahi hai,
Is main sare jahan ka
Vistaar hona chahiye,
Khudi ko karna ho buland,
Khud se pyar hona chahiye....

Jeena 'jindgi' nahi hai
Jeene ki chahat
Pane ki taakat
Khone ka haunsla
Or kho kar sab fir
Apnepan ka apne hi se
Vyavhaar hona chahiye....
Khudi ko karna ho buland,
Khud se pyar hona chahiye....

Anil Aarya...

De hounsla...

Ya Rab de hounsla,
Jeena tere bina
Naamumakin to nahi,
Mushkil bahut hai...
Tujhe har pal chahna,
Aasaan saa kam,
Or ise
Tumhi se chupana....
Namumkin to nahi,
Mushkil bahut hai...
Tera iskq
Blood cancer..........
Apne lahu se lad pana,
Namumkin to nahi,
Mushkil bahut hai...
Ya Rab
Mujhe de hounsla....
Tere bin zinda hun,
Jee pana ...
Namumkin to nahi,
Haan Mushkil bahut hai....

ANIL AARYA...

Kismat ki baat hai

Lutaa diya apna har katra ishq main or main neelaam ho gaya,
Bas julm itna sa mere sath ki ek bhi saksha mera na hua...
Jalte - tapte raha Suraj ke garam thapedon se,
Par andhera hi mila, mere naam ek bhi sawera na hua...
Barpaya kahar itna to bhi hum toote nahi kya kam tha ?
Zinda hun to jee bhi leta, zindgi mujhe do pal bhi ahsaas tera na hua...
Ek bhi saksha mera na hua...
Anil Aarya..