Wednesday, 23 July 2014

मुस्कान

मुझे परवाह नहीं
ग़म के बादल छटें कब,
ये चेहरा सदा
मुस्कुराता रहेगा...
इम्तिहानों - आजमाइशों
का अजब सिलसिला
जो जीता तो हरदम,
वो पाता रहेगा...
हारना नहीं आता
है लड़ना मुकद्दर,
ये समय क्या हमें
आज़माता रहेगा...
जीना
ज़हर पीना
जब ख्वाहिशों मॆं था शामिल,
तो
ज़िंदगी को मुकद्दर
हिलाता रहेगा...
मरना जो चाहो
तो मरने न देगा,
विष अमृत बनकर
जिलाता रहेगा,
अनिल जीने की कोशिश
न करना भूलकर भी,
विष अंदर ही अंदर
गलाता रहेगा...
मेरे मालिक
तू लाख तक़लीफ़ों का
मुझे सिलसिला दे,
ये चेहरा सदा
मुस्कुराता रहेगा...

अनिल आर्य...

Monday, 21 July 2014

कभी कभी

कभी - कभी
साहस को
दुस्साहस तक
ले जाना पड़ता है,
भटके को राह दिखाने
दीपक बन
जल जाना पड़ता है,
अपनों के प्रेम
अपना हर सपना
जलाना पड़ता है,
समय पाश में बँधकर
दोस्त को दुश्मन
बनाना पड़ता है,
उसकी ख़ुशी हेतु
हर ग़म उठाना पड़ता है...

अनिल आर्य...

Friday, 18 July 2014

मानवता

मानव बनकर,
मानवता की
अमानवीय क़ीमत
चुका रहा हूँ मैं...
सच कहता हूँ
मानव बनकर
पछता रहा हूँ मैं...
जो - जो पाया
सो - सो खोया,
कम हँसा
और ज़्यादा रोया...
अपने नाज़ुक से
हृदय पर
आघात लगा कर ;
जख्मों में
नासूर पिरोया...
दुखों की
पतवार बनाकर
अश्रु - सरिता में ;
बहता जा रहा हूँ मैं,
सच कहता हूँ
मानव बनकर
पछता रहा हूँ मैं...

अनिल आर्य...

Thursday, 3 July 2014

व्यवहार

इस रंग
बदलती दुनिया मेँ
व्यवहार बनाना
सु:खकर है,

दुःखकर है
प्रीत लगाना यहाँ
यहाँ प्रीत निभाना
दुःखकर है,

दुःखकर रिश्तों मेँ
सच्चाई
अच्छा होना भी
दुःखकर है,

इस रंग
बदलती दुनिया मेँ
बस
व्यवहार बनाना
सु:खकर है...

अनिल आर्य...