Tuesday, 30 December 2014

अपने गम

सीने से लगा ले मुझको
और अपने सारे गम
मेरी रूह मैं उतार दे ,
अपने आंसुओं से भिगो दे मुझको
मेरे मैले उपमान संवार दे
नए उपमान गढ़ूं मैं
मेरे अनंत को अनंत विस्तार दे ,
मत रूठ मुझसे किस्मत मेरी
बस इतना कर उपकार दे
हर्षित कर अपना तन-मन-जीवन
जो मुझको ख़ुशी अपार दे,
सीने से लगा ले मुझको
और अपने सारे गम मेरी
रूह मैं उतार दे …

अनिल आर्य…



Saja

रोज जीने की नई नई 
वज़ह देता हूँ 
मैं खुद को ऐसे
सजा देता हूँ  … 

मकसद नहीं कोई 
बस रोतों को 
हँसा देता हूँ 
तो खुद के ग़म 
भुला देता हूँ  … 

हर-पल हर-सू 
मौत को दगा देता हूँ 
जिंदगी को जीता देता हूँ 
यूँ खुद को मैं
सजा  हूँ 
खुद को जीने की 
नयी नयी वजह देता हूँ 

अनिल आर्य  … 





सुन ले जरा

सुनता हूँ की तू
सुनता नहीं किसी की
सुना नहीं करता था मैं भी
सूना होने से पहले …

सूना होने से जाना
कहता नहीं यूँ कोई
आज सुनने को मैं तरसता
कहने को बचा न कोई …

अनिल आर्य … 

Sunday, 21 December 2014

हद है

हद है कि
मेरे प्यार की
हद नहीं जानता
समन्दर मेरा  …

बिखेर देता है
तेरी जरुरत भर
का प्यार
इन साहिलों पर  …

इसीलिए
न जान पाए
गहराई
मेरे इश्क़ की ,
मेरे अन्दर उतरने की
जरुरत न पड़ी
तुमको कभी  …

अनिल आर्य… 

Monday, 29 September 2014

इस बार

हर बार तोड़ा विश्वास लोगों ने
लोगों ने मज़ाक बनाया हर बार,
मेरी इंसानियत का जनाजा उठे धूम से
लोगों ने ज़ोर लगाया हर बार...
हर बार खुद मैं सम्बल पाया मैंने
मैंने बिखरे ख़ुद को जोड़ा हर बार,
संघर्ष मेरा अमर, अनथक ये समर
क्या होगा जो न जोड़ पाया
ख़ुद को मैं इस बार ? ? ? ?

अनिल आर्य...
29/09/2014 10:48pm

Monday, 25 August 2014

आवाज़ मैं न दूँगा

कल मेरा मौन
       नहीं सुना तुमने
आज आवाज़
          मैं न दूँगा...
मेरा आगाज था सुनहरा
         घर ख़ुद का जला बैठा
नहीं होली की अब तमन्ना
        अंजाम मैं न दूँगा...
कल मेरा मौन
       नहीं सुना तुमने
आज आवाज़
          मैं न दूँगा...

अनिल आर्य...

Sunday, 24 August 2014

हिंदी दिवस

UPSC व MODI को समर्पित

देश बेच दिया
अप्रत्यक्ष गद्दारौं ने,
काश ख़रीदार ऐ मुल्क
कोई हिंदी होता...
मोदी देगा सुनहरा भाषण
हिंदी दिवस पर,
काश हिंदी के जनाजे पे भाषणकर्ता
कोई प्रत्यक्ष फिरन्गी होता...

अनिल आर्य...

Saturday, 9 August 2014

रक्षा-बंधन

मेरी बहनों को रक्षा-बंधन के पावन
अवसर पर समर्पित चंद पंक्तियां...

भाई-बहन का अप्रतिम बंधन
स्नेह-प्रीति का मांगलिक वंदन
रक्षा-हेतु समर्पित हो तन-मन
हृदय-पावन हो जाए जन-जन
है ऐसा पवित्र-पर्व ये रक्षा-बंधन....

अनिल आर्य...

Wednesday, 6 August 2014

सौभाग्य

देखे थे जो सपने
रात को,
सुबह को उठकर
तोड़ दिए,
मैं दिये जलाता था
हर रस्ते,
अपने आँगन अँधियारे
छोड़ दिए...

जिस जिसको दिखाया
रस्ता मैंने,
नेकी की जगह
बदी मिली,
जिस जिसको समेटा
बिखरने से,
सबकी बद्दुआएँ
सधी मिली...

रात रात भर
जगे थे,
जिन्हें हम
सुलाने को,
पूरी ताक़त
लगा दिए वो,
मेरी नींद
उड़ाने को...

एक यही सौभाग्य
हासिल हमको,
की जीवन मेँ
दुर्भाग्य मिला,
जिस जिस रस्ते
था मैं दौड़ा,
वो हरदम मंजिल से
दूर खुला...

इस तरह
बाल सफेद किए,
जो भटके रस्ते
तो सैर किए,
जानी जन जन
की सच्चाई,
आये रस्ते बिन
देर किए...

जो पहुँच जाता मंजिल
सीधे सीधे,
तो मज़ा क्या होता
जीने मेँ,
आख़िर इन्सा वो
क्या इन्सा,
जो दर्द न पाले
सीने मेँ...

अनिल आर्य...

Wednesday, 23 July 2014

मुस्कान

मुझे परवाह नहीं
ग़म के बादल छटें कब,
ये चेहरा सदा
मुस्कुराता रहेगा...
इम्तिहानों - आजमाइशों
का अजब सिलसिला
जो जीता तो हरदम,
वो पाता रहेगा...
हारना नहीं आता
है लड़ना मुकद्दर,
ये समय क्या हमें
आज़माता रहेगा...
जीना
ज़हर पीना
जब ख्वाहिशों मॆं था शामिल,
तो
ज़िंदगी को मुकद्दर
हिलाता रहेगा...
मरना जो चाहो
तो मरने न देगा,
विष अमृत बनकर
जिलाता रहेगा,
अनिल जीने की कोशिश
न करना भूलकर भी,
विष अंदर ही अंदर
गलाता रहेगा...
मेरे मालिक
तू लाख तक़लीफ़ों का
मुझे सिलसिला दे,
ये चेहरा सदा
मुस्कुराता रहेगा...

अनिल आर्य...

Monday, 21 July 2014

कभी कभी

कभी - कभी
साहस को
दुस्साहस तक
ले जाना पड़ता है,
भटके को राह दिखाने
दीपक बन
जल जाना पड़ता है,
अपनों के प्रेम
अपना हर सपना
जलाना पड़ता है,
समय पाश में बँधकर
दोस्त को दुश्मन
बनाना पड़ता है,
उसकी ख़ुशी हेतु
हर ग़म उठाना पड़ता है...

अनिल आर्य...

Friday, 18 July 2014

मानवता

मानव बनकर,
मानवता की
अमानवीय क़ीमत
चुका रहा हूँ मैं...
सच कहता हूँ
मानव बनकर
पछता रहा हूँ मैं...
जो - जो पाया
सो - सो खोया,
कम हँसा
और ज़्यादा रोया...
अपने नाज़ुक से
हृदय पर
आघात लगा कर ;
जख्मों में
नासूर पिरोया...
दुखों की
पतवार बनाकर
अश्रु - सरिता में ;
बहता जा रहा हूँ मैं,
सच कहता हूँ
मानव बनकर
पछता रहा हूँ मैं...

अनिल आर्य...

Thursday, 3 July 2014

व्यवहार

इस रंग
बदलती दुनिया मेँ
व्यवहार बनाना
सु:खकर है,

दुःखकर है
प्रीत लगाना यहाँ
यहाँ प्रीत निभाना
दुःखकर है,

दुःखकर रिश्तों मेँ
सच्चाई
अच्छा होना भी
दुःखकर है,

इस रंग
बदलती दुनिया मेँ
बस
व्यवहार बनाना
सु:खकर है...

अनिल आर्य...

Monday, 30 June 2014

क़दम वापस हटा लूँ...

हवाओं को कह दो
खुदको आजमा लो,
फिजाअों को कह दो
कहर बरपा लो,
क़दम वापस हटा लूँ
ये मुमकिन न होगा,
चाहे मेरे रास्तों पे
काँटे बिछा लो...
शोलों की लौ कि
औकात क्या ? ? ?
गर
दिल मेँ दहकते
अंगारे बसा लो...

अनिल आर्य...

Sunday, 15 June 2014

पिता जीवन का आधार
पिता इस जीवन का सार
पिता गर्म - गर्म धूप
पिता देता हमको रूप

Saturday, 14 June 2014

रंग

रंगीन तो हैं
कपड़े
रंगों की पर
कमी है
ज़िंदगी को जो
रंग डाले
होली कभी न आई
होली की बात
छोड़ो
मन से न मनी
दिवाली
हाँ दिवाला खुल के
निकला
खुल के दिल हँसा है
हँस के तो
खुशी पायी
खुद पे हँसना
कौन गुनाह है ?

अनिल आर्य...

Wednesday, 11 June 2014

ग़म

हर रोज़ 
आ ही पहुँचता है 
मेरे दर पर 
ग़म 
किसी न 
किसी बहाने से 
लाख़ बदलूँ 
मकाँ /
पता 
मुक़द्दर
मग़र माथे 
सजा है 
ढूँढ ही लेता है 
मुझे 
भरी भीड़ में 
एक 
ग़म ही तो है 
जो 
तन्हाई मेँ 
साथी बचा है 

अनिल आर्य… 

मील का पत्थर

मेरे एहसास...
मरते गये...
और वो...
दर्द बढ़ाता गया...
इन्तेहाँ की हद...
कहर ढाने को..
वो पत्थर से...
इन्सान हुआ...
और...
सह-सहकर...
मैं...
इन्सान से...
पत्थर...
इंसानियत...
के...
पथ पर...
एक नया...
मील का पत्थर...

अनिल आर्य...

Tuesday, 10 June 2014

एहसासों की क़ीमत

जिस्म से चट्टान
कलेजे से जल्लाद हुआ
रूह से शैतान हो जाऊँ
तो माफ़ करना,
हूँ ज़ख्म खाकर
मुस्कुराता
किसी दर्द से न
सिहरता
शायद
मेरी इन्सानियत
दम तोड़ने पर
तुली है,
एहसासों ने मिलकर
है इतना झँझोड़ा
कि एहसासों की क़ीमत
आज़ कुछ ना
बची है…


अनिल आर्य… 

Monday, 9 June 2014

दर्द भरी मुस्कान

मुझे तोड़ा तो बहुत है
मेरे अपनों ने
मेरा बेशर्म सा वजूद
पर
बिखरता नहीं है ,
मैं रुकता
ठहरता
सम्भालता हूँ ख़ुदको,
फिर अपना कोई
बना देता
पराया ,
बाहर वालों की
हिम्मत
जो जट्ट से
टकरा लें ,
वो तो रिश्ते
अंदरूनी
जो तड़पा के
न मारें,
ये मुस्कुराहट लबों की
मैं हटने न दूँगा
चाहे मेरे अपने
कहर बरपा लें...

अनिल आर्य...

Sunday, 8 June 2014

सक्षम

सक्षम पाता हूँ
सब कुछ करने को
मौत को भी
छल सकता हूँ
हूँ लहू का एक कतरा
वक़्त आने पर
जमता हूँ
वक्त आने पर
उबल सकता हूँ

















अनिल आर्य… 

Wednesday, 4 June 2014

पर्यावरण

अर्थ के व्यर्थ मोह मेँ
फँस कर
जो रोपोगे
सो पाओगे,
पैसा होगा बहुत
मगर
जीने को
स्वच्छ पर्यावरण कहाँ से
लाओगे...

अनिल आर्य...

Monday, 2 June 2014

love urself

उन्मुक्त मन से उड़ानें भर लो,
अपने " मैं" में
बस तुम ही न रहो
सारे जहाँ को शामिल कर लो,
बदल रहा ज़माना
बदलो
खुद से भी
अब प्यार तुम कर लो...

अनिल आर्य...

Sunday, 1 June 2014

मैं एक आईना

मेरे जज्बात मेरी रूह मैं उतर जाते हैँ
और मैं जमाने की हक़ीकत बँया करता हूँ
मुझे केवल " मैं " न समझो
मैं एक आईना हूँ
झांकता ज़माना मुझमें
सूरत नहीं
बस सीरत दिखाने को
आमादा है तबीयत मेरी...
मुझे खुद से मुहब्बत है
दीवानगी की हद तक
है खुदा से गुज़ारिश
मेरे मैं मे
मुझे भी पनाह दे...

अनिल आर्य...

Thursday, 22 May 2014

कर्म

कर्मयोगी को
परवाह
भला क्या
कर्म प्रवाह में बहा चले,
चाहे ढह जाये
मिट्टी सा
या खंडहर सा
निःशेष रहा चले,
पाषाण हृदय
जर्जर शरीर संग
अनथक
धूप के माँह चले,
न चंचलता
हृदय की
न फल कि चिंता
कातर चितवन
यहाँ कहाँ चले,
जो हो
निरा ज्ञानी
नहीं
उसकी सानी
हरदम तलाश वो
छाँह चले,
मैं अज्ञानी
जीवन पानी
अनजाने अनंत कि
गहराइयों के
माँह चले...

अनिल आर्य...

Monday, 19 May 2014

शाश्वत नींद

ये भयानक है
कि पलकें भी
बंद हैं
और
नींद नहीं आती...
बेहतर हो
पलकें
तो
खुली रहें
और
मैं सो जाऊँ...
अनिल आर्य...

यथार्थ

मेरी जो
कमजोरी कहते हो
ताकत है
दिखला दूँगा,
अपने भुजबल कि
ताकत से
पत्थर को
पिघला दूँगा...
मनोबल
तपोबल
और बाहुबल
वीरों का ये गहना है,
इससे
पीछे नहीं हटूंगा
मैंने
हँसकर पहना है...
जीवन
अजस्र प्रवाह
स्नेह का,
मैं स्नेह सरिता
बहा दूँगा,
खाली बातों
पर मत जाना
मैं
साबित कर के
दिखा दूँगा...

अनिल आर्य...

Sunday, 18 May 2014

इंसानियत

जो मैं
करता कहता
सुनता सहता हूँ
इसे मेरी
कमजोरी न जानो.
ये तो
इंसानियत की
ताक़त दिखा रहा हूँ मैं...
इंसान बनाया है
मुझे
मेरे बनाने वाले ने
बस
इंसानियत
निभा रहा हूँ मैं...

अनिल आर्य...

Saturday, 10 May 2014

मेरी माँ…

वह 
शान्त, स्नेहमयी 
समय आने पर
मेरी रक्षार्थ  
बन जाये दुर्गा 
लड़ जाए ज़माने से 
भिड़ जाये खुदा से 
बिन किए अपनी परवाह 
मेरी माँ… 

वह 
जो मेरे जीवन 
का आधार 
मुझको करती 
असीमित प्यार 
मेरे इर्द-गिर्द घूमता 
है जिसका सारा संसार 
सब से ज्यादा 
करती है मेरी परवाह 
मेरी माँ...



वह 
हजारों 
जन्म लेकर भी 
जिससे उऋण 
न हो पाऊँ 
हो जाता हूँ 
गदगद 
जब उसका 
अंश कहाऊँ 
करती जग में 
सबसे ज्यादा 
है मेरी परवाह 
मेरी माँ… 

वह 
जिसके प्राण पीकर 
मैंने पाया ये रूप 
जिसकी आँखों से 
देखा जग का स्वरूप 
जिसकी शिक्षा से 
सभ्यता मैने पाई 
जिसके सानिध्य में 
जीने की कला आई 
आज भी मुझे 
छोटा जानकर 
करती बड़ी परवाह 
मेरी माँ…

        अनिल आर्य… 

Wednesday, 7 May 2014

आर्यव्रत कि नारी....

आप सभी विनीत मित्रों कि विशिष्ट मंडली को 
ईश्वर की सर्वोत्कृष्ट रचना अर्थात  ' नारी '
के बारे में, मैं अपने कुछ विचार सादर समर्पित 
करता हूँ… 
जानता हूँ अभिव्यक्ति थोडी कठिन है, किन्तु 
भाव ग्रहण एवं आत्मसात करके कृतार्थ करें… 

  आर्यव्रत कि नारी


अंतर-तारक धूल विनिर्मित
स्वाभाविक आकर्षण सुसज्जित
मृदुल-मेखला आवरण केश
स्नेह-सिंचित व्यवहार विशेष
विश्वनीयता ज्यों ज्वलंत ज्वाला
नयनो में विश्रांत मधुशाला
सहृदयता समग्रता शाश्वत साभार
अनुपम अदभुत ईश्वरीय उपहार
मंत्रमुग्ध पांडित्य पराजित
स्निग्ध सौम्य शालीन परिमार्जित
सह-आस्तित्व का यथार्थ संवेग
निस्सृत ज्वाल दमित-उद्वेग
प्रजनन-पोषण वर्धन दायित्व
पाषाण-खण्ड सम अखंड स्थायित्व
अन्तर्मन-आलोकित उजियारा
भस्मीभूत करती अँधियारा
मौत से पा चुकी ये पार
पतिव्रता की शक्ति अपार
उज्ज्वल प्रदीप्त छवि अति प्यारी
यही तो है आर्यव्रत कि नारी....


             











           अनिल आर्य… 

Thursday, 1 May 2014

जिंदगी में खुशियाँ-खुशियाँ, संभलती नहीं संभाले...

हर कोई नहीं होता
जो करे बेशुमार मुहब्बत
बर्बादियों कि चाहत
हर किसी को नहीं होती…

बेचैनी हर घड़ी कि
पाले तो कौन पाले
जट्ट को फ़िक्र कहाँ सब
हर आफ़त गले लगा ले…

ज़िस्म रूह से हो जुदा जब
तकलीफ़ तो होती होगी
तुम से जुदाई मेरी
कोई मौत को बुला ले…

तुम फफ़क के रो पड़ोगी
जो मैं गम का बस्ता खोला
हैरानगी है होती
जो मेरी हँसी पे आँख नम हैं....

जिंदगी में खुशियाँ-खुशियाँ
संभलती नहीं संभाले ,
ग़मों कि पड़ी कमी है
हर सितमगर से कह दो
जट्ट को वो आजमा लें…


अनिल आर्य… 

Wednesday, 30 April 2014

मेरे अजीज

हम
नहीं चुन सकते
वो
जो करें
मुहब्बत हमसे,
दे सकें
दो पल की
खुशियाँ,
कम से कम
चुनाव
हाथ है उनका,
जो करें
तिज़ारत,
या तो वो
जिनके लिए
तकलीफ़ सहने में
हमें
तकलीफ़ न हो…
मैंने
चुन लिये
अपने लिये
कुछ अज़ीज,
हैरानी होती नहीं
चोट खाकर
उनके हाथों…
उनके हाथ
पत्थर की जगह
फूल देखकर
बैचैनी जरूर होती है
सोचता हूँ
आज
चोट पड़ेगी
कलेजे पर,
पर फिक्र कैसी
वो भी तो उन्ही का है…


अनिल आर्य… 

सुलगने का मज़ा

मेरी चाहतों का
          अजब सिलसिला है
तेरी रुख़सतों में
           मज़ा जो मिला है
अन्दाज 'अनिल' अब
            संभाले न संभलें
उठने में नहीं
            जो गिरने का मज़ा है
इश्क़ में आशिक़
            मरे तो मरे फ़िर
जो जीता है उसको
            कौन पूछता है ???
है जान हाज़िर
             आज ही क़त्ल कर दो
ज़िंदा हूँ लेकिन
              ज़िंदगी से ग़िला है
गौरमतलब मुहब्बत
             है तेरी कहानी
जो जितना बुझा है
             वो उतना जला है
मैंने बुझ के जाना
            जलने में नहीं कुछ
सुलगने में है जो
             वो असली मज़ा है....


 अनिल आर्य…

Tuesday, 29 April 2014

तांडव का लास्य

दो कांच के टुकड़े
हैं छुपाते
मेरी लाल सुर्ख आँखें
सच तो ये है
की आँखों में ये सुर्खी
सुर्खी नहीं
उबलता लहू है
कहीं बह न निकले
जला दे जमाना
ये अजस्त्र लावा - ज्वाल
क्यों जमता नहीं है ???
है तोड़ा - मरोड़ा
झँझोड़ा भी खुद को
ये तांडव का लास्य
बदलता नहीं  है …


अनिल आर्य… 

थोड़ी सी ग़ैरत / बची थी / लुटा दी

नींद नहीं आती
तेरी बेरुखी से
तड़पने को छोड़ा
बस मारा नहीं है

जीने की चाहत
मेरी बहुत है
बस जीने के लायक
जहां चाहिये है

ज़माने ने समझा नहीं
इसलिए किया सब
तुम जानती थी
फिर भला क्यों ऐसा ???

थोड़ी सी ग़ैरत
बची थी
लुटा दी ,
क्या अब ऐसा
जिस पर
फक्र हो ???

रब के कुफ्र से
शिकायत भला क्यों ???
तुम तो थी अपनी
तुम्हारा कुफ्र झेला....

शिकायत नहीं तुमसे
नहीं कोई गिला है
जिसकी जो किस्मत
उसको मिला है…

बस थोड़ी हिम्मत कर के
और थोड़ी हद कर दो
मेरी हद खत्म फ़िर
फिर
मेरा सिलसिला है…

अनिल आर्य …

दो मीठे बोल प्यार के ग़र दे सको तुम...

दे दिया करो
दो मीठे बोल प्यार के
ग़र दे सको तुम,
ये सैद्धांतिक तल्ख़ भाषण
रहने ही दो कृपा हो,
उपदेश आजकल
खलते बहुत हैँ…
'आस्था' से आस्था
डगमगा सी गयी है ,
बस थोड़ा प्यार माँगा था
नहीं देना तो मत दो,
रूखा अन्दाज इतना
हुई कौन सी खता है ???

अनिल आर्य.... 

Bhikhri zindgi

Motiyon ki mala
Bhikri padi ho jaise,
Yun bikhar si gayi hai
Kuch zindgi hamari....
Koi samate to kah dun
Na baandho mujhe tum,
Ab bandhan main mera dum
Ghutne sa laga hai...

Anil Aarya...

Monday, 28 April 2014

कैसी ये तेरी बंदगी है....

ख़ामोश लबों पर है 
बेजुबां हकीक़त 
बेतरतीब सी बिखरी है  
बेइन्तिहाँ मुहब्बत.... 
और 
हक़कीत को खोल के 
बताया नहीं जाता 
ये इश्क़ ओ मुश्क़ है 'अनिल'
छुपाया नहीं  जाता.... 
और
ये इश्क़ ही बंदगी 
ये इश्क़ ही खुदा है 
और अपनी खुदाई 
इस जग से जुदा है.... 
हमारा 
जीना भी लाज़मी है 
और ये टुकड़ों कि जिंदगी है 
खुदा जो ठुकरा दे बन्दे 
तो कैसी ये तेरी बंदगी है.... 


 अनिल आर्य… 

Sunday, 27 April 2014

चैन से जी लेने दो....

विश्वास दिला कर 
अक्सर 
विश्वास 
हिला देते हैं लोग 
हर बार 
इक नया 
अपमान का घूँट 
पिला देते हैं लोग.... 

कवच गया 
कुण्डल गया 
ये सब 
कर्ण कि थाती है 
अच्छा जी, 
तिक्त शब्दरूप 
विष भी पीना है 
अभी महादेव भी बाकी है.... 

अरे 
मधुरतम जीवन 
के इस 
प्राँगण में 
यौवन के सुखतम से 
क्षण में 
अपने प्राणों 
के इस 
प्रण में 
जीवन के छोटे से 
रण में 
मुझे घाव सी लेने दो 
जीने का है 
शौक मुझे भी 
ज़रा
 चैन से जी लेने दो.... 


अनिल आर्य.... 

Saturday, 26 April 2014

विश्वशक्ति का ध्वज तिरंगा

विजय-भेरी का मैं रण बांकुरा 
रण-भेरी से कभी डरा नहीं 
चारों और से मौत थी झपटी 
दुश्मन के हाथों मरा नहीं.... 

विजय-दम्भ में डूब कभी मैं 
आतप से उतराया ना 
दुश्मन भी जो झुका कभी तो 
उस पर खड़ग उठाया ना.... 

सौगन्ध मुझे इस मिट्टी कि 
इस मिट्टी में ही मिला दूँगा 
भारत का वीर सिपाही हूँ 
प्रलय तक को धूल चटा दूँगा.... 

जो मेरे भारत पर वार किया 
तो केसरिया कर जाऊँगा 
क्या मौत कि औक़ात है जो 
तुझे मारे बिन मर जाऊँगा.... 

विश्वशक्ति का ध्वज तिरंगा
नव-परिवर्तन कर जाएगा 
होगा शांति-संधान जगत में 
तिरंगा शान से लहराएगा.... 


अनिल आर्य....

Friday, 25 April 2014

जाग मुसाफिर; अब रैन भुला


महासमर अनश्वर में 
 प्राणों की पीड़ा मत ढूँढो 
प्यार की अभिव्यक्ति में
      स्वप्न कि क्रीड़ा मत ढूँढो… 

 ढूँढने से कुछ नहीं मिलेगा 
खो जाओगे तो पाएगा
तैरोगे तो डूबोगे 
      जो डूबोगे उतरायेगा… 



खो जाओ तुम प्रेम भँवर में 
खोना-पाना सब भूल-भुला 
 मत सोचो क्या हासिल मुझको
     सब खोया लेकिन कुछ नहीं मिला… 

खोना-पाना तो क़िस्मत है 
रोने से हासिल क्या होगा ?
जाग मुसाफिर; अब रैन भुला 
   सोने से हासिल क्या होगा ???

   अनिल आर्य…

Thursday, 17 April 2014

मुक़म्मल

मुक़म्मल होने की चाहत में
दिन-रात भुला बैठा
और मुक़म्मल हुआ
तो पाया
कि इस आधे-अधूरे जहां में
कोई मुक़म्मल नहीं होता....


जो दिखते हैं मुक़म्मल
है नक़ाब उनके चेहरे
उनकी हकीक़त जाकर
उनके आइनों से पूछो....
उनकी आँखों मैं झांककर देखो
रूह का चैन नहीं मिलता
कि इस आधे-अधूरे जहां में
कोई मुक़म्मल नहीं होता....


अनिल आर्य…

मुनासिब नही होता....

अरे, ओ आसमां वालो !
जमीं न छोड़ देना तुम....  
पैरों की कीमत पर 
पंखों मैं उड़ान भरना 
मुमकिन तो होता है 
पर मुनासिब नही होता.... 
अनिल आर्य.... 

ये मूर्ख जमाना कहता है , मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ…

मैं खुद में खोया रहता हूँ
खुद की ही बातें करता हूँ
और ये मूर्ख जमाना कहता है
मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ…

किसी की मुझे परवाह नहीं
किसी का भी होने से, मैं डरता हूँ
और ये मूर्ख जमाना कहता है
मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ…

आहों की महफ़िल से बस मेरी यारी है
और मैं निपट-अकेले रमता हूँ
और ये मूर्ख जमाना कहता है
मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ…


वैसे मेरी खुद की कोई ख़ास औकात नहीं
मुझ पत्थर में तेरे जैसे शुद्ध-देसी ज़ज्बात नहीं
लेकिन फिर भी मैं खुद का हीरो,
खुद की बहुत इज्जत करता हूँ
और ये मूर्ख जमाना कहता है
मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ…



किसी के ज़ज्बातों की कोई चाहत नहीं
कौन कहता है मुझे खुद से मोहब्बत नहीं
मैं खुद पर मरता हूँ
जज्बाती होने से बस डरता हूँ
और ये मूर्ख जमाना कहता है
मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ…

                 अनिल आर्य....





अमर - समर

मेरे विधाता 
क्यूँ 
विरुद्ध विधि के मेरी 
  मेरा समर है ?

सुन वज्र ह्रदयी 
न हारूँगा 
आयुर्बल मेरा 
अमर है… 

थका हूँ 
पर हारा नहीं हूँ,
बदक़िस्मत सही 
     बेचारा नहीं हूँ.… 

लगन का धनी हूँ 
हूँ पक्का अपनी जुबान का,
कभी तो कहीं मिलूंगा तुमसे
ये वादा रहा आज 
    जमीन से आसमान का....

मेरा अमर - समर 
मुझसे ही चलता है 
देखता हूँ 
कब तक मेरा विधाता 
   मुझको ही छलता है… 

अनिल अपार साहस
 जीत की परिभाषा है,
जीतूँगा एक दिन 
मुझको खुद से 
   आशा है....

     अनिल आर्य.... 




Wednesday, 16 April 2014

कुंदन

जीवन की ज्वाला मैं अकसर
         तपकर ही कुंदन होते हैं,
जो धू - धू  कर के जलते हैं 
        वो स्वयं प्रकाशित होते हैं.… 
सूरज खुद से चमकते हैं 
        चंदा प्रकाश को ढ़ोते हैं,
ग्रह परिक्रमा करते हैं
          तब खुद परिक्रमित होते हैं....


         

 अनिल आर्य.... 

Monday, 14 April 2014

प्यास

जो मेरी प्यास 
बुझ गई होती ,
तो ये जिंदगी भी 
कोई जिंदगी होती.... 

मैं मर जाऊँगा 
इस प्यास से ,
प्यास ये कुछ ख़ास है 
ख़ास ये एहसास है… 

इसके बुझने में 
मजा नहीं,
भड़कने में  कोई 
सजा नहीं ,
ये बुझ जाये 
ऐसी मेरी रज़ा  नही.... 

क्योंकि 
जो मेरी प्यास 
बुझ गई होती ,
तो ये जिंदगी भी 
कोई जिंदगी होती.... 

प्यास की क़ीमत 
आज प्यासा जानता है
कल कुंआ बतलाएगा ,
नहीं आया ग़र कोई प्यासा दर पे 
तो कुंआ सड़ जाएगा.... 

हर कोई जानता है 
कि  इतिहास खुद को 
दोहराता है,
कभी प्यासा कुंवे  के पास 
तो कभी कुंआ प्यासे के पास 
जाता है.... 

वक़्त के हाथों 
हर कोई मजबूर है,
कल कुंआ प्यासे से 
दूर था
और आज प्यासा कुँवें  से 
दूर है.... 



प्यासे ने मस्ती मैं झूम कर 
कुछ यूँ लिखा कि ,
जो मेरी प्यास 
बुझ गई होती ,
तो ये जिंदगी भी 
कोई जिंदगी होती.... 
ग़र बुझ जाती ये 
तो फिर क्या मेरी बंदगी होती ?
बिन बंदगी 
क्या मेरी जिंदगी होती…… 

न किसी का क़सूर ,
यही जिंदगी का दस्तूर 
कुंआ सड़ गया ,
प्यासा मर गया 
दोनों हारे,
जीता उनका गुरूर.... 

दोनों बेक़सूर 
हार कर भी 
विजय दम्भ मैं चूर 
क्या सच मैं दोनों बेक़सूर ???

                      अनिल आर्य…



मैं लाख सच बोलूंगा, तू मेरी एक न मानेगी....

मैं लाख सच बोलूँ,
मेरी एक न मानेगी....
और वो एक झूठ बोलेगा,
उसे सराबोर कर देगा…

ये जाट सोया शेर है ,
इसे ज्यादा न छेड़ो तुम,
ये जो जाग जायेगा
तो बस आर-पार कर देगा…


हार-जीत का
इसे मोल भाव नहीं आता ,
ये रोहतक का मौलड़ जाट
किसे की सौड़ सी भर देगा…



जब तक तू जानेगी
'अनिल' तीन-तेरह कर देगा…
और फिर मैं लाख सच बोलूंगा,
तू मेरी एक न मानेगी....
और वो एक झूठ बोलेगा,
तुझे सराबोर कर देगा…

                 अनिल आर्य… 

हाँ मेरे जैसे मुझको कल मिलेंगे

मेरी उमर में
उठाया हो दोस्ती में
नुकसान इतना....
इतने कम मिलेंगे....
और जितने भी मिलेंगे ,
दुखी हरदम मिलेंगे....
अरे ! उनकी किस्मत होगी ऐसी
की हरदम बाँटेंगे
अपने हिस्से की खुशियाँ सबको,
बदले मैं
सबके हिस्से के गम मिलेंगे....
चल आज नहीं तो कल सही,
हाँ मेरे जैसे मुझको कल मिलेंगे....

                   अनिल आर्य… 

शिद्दत से चाहा था , शिद्दत से भुला देंगे ...

शिद्दत से चाहा था
शिद्दत से भुला देंगे 
अपने दिल की किताब से 
इश्क़ का हर अल्फ़ाज़ मिटा देंगे.... 

इश्क़ करने की 'अनिल'
तुझे ऐसी सजा देंगे 
तेरी हस्ती-औ-नाम परस्ती को 
मिटटी मैं मिला देंगे.... 

ए - जिगर तू रोएगा 
तू मुझसे फरियाद करेगा,
तेरे इश्क़ ओ माशूक़ को हम भुला देंगे,
तेरी बेपनाह मुहब्बत की 
बेशुमार दौलत को,
हम इस बेदर्द ज़माने पर 
बड़ी बेदर्दी से लूटा देंगे....



करने चला था इश्क़, साला !
सर का भूत भगा देंगे ,
मिट जाएगी या तो हस्ती तेरी,
या तेरा इश्क़ मिटा देंगे… 

चिंता न करना जान मेरी 
तेरा नाम दिल से भुला देंगे,
जान है जब तलक जान मैं 
हम पूरी जान लगा देंगे.... 

जितनी शिद्दत से चाहा था 
उतनी शिद्दत से भुला देंगे,
अपने दिल की किताब से 'अनिल'
इश्क़ का हर अल्फ़ाज़ मिटा देंगे…


अनिल आर्य…

ज़िद है....

खुद की  बनायी
हर सीमा के
पार जाने की ज़िद है,
खुद से जीत कर
खुद ही हार जाने की ज़िद है …

नाकाफ़ी हैं तेरी दोस्ती
मेरी हसरतों के लिए,
तुझे पूरा खोने की
या तो पूरा पाने की ज़िद है....

हर बार हारा
दोस्ती मैं जो सख्स,
प्यार मैं उसे
पार पाने  की ज़िद है....


आज आजमा लूँ तुम्हे भी
ऐ मेरे बदनसीब - नसीब ,
फ़लक तक जाकर, चाँद छुए बिन
लौट आने की ज़िद है....

तेरे खिलाफ़ लड़ना 
मुनासिब नहीं 'अनिल'
तुम्हे पाने की बजाय
भूल जाने की ज़िद है....


खुद की  बनायी
हर सीमा के
पार जाने की ज़िद है,
खुद से जीत कर
खुद ही हार जाने की ज़िद है….

                      This is future.... One day.... i will make it true... Anil Aarya.... अनिल आर्य 


Wednesday, 9 April 2014

Tere bol...

Meri rooh Tak ko
sansana deta hai
Tera ek bol...
Mujhe gunaah tak
Ka pata nahi
Bas tu saja bol...
Kar dun teen terah
Bas apni
Raja bol...
Main niche gir jaun ?
Jo upar uthne main
Tujhe aata ho maja bol ???

Tuesday, 8 April 2014

Sun le khuda

Janta hun tere andar ki
Jhank chuka
Gahrayi main,
Bahut khoobsurat
Dil hai tera,
Bas uspar naam
Nahi mera...
Na hi likh paunga kabhi,
Tere dil pe
Kharonch aa gayi to ???
Mar jaunga jeete ji,
Tujhpe kya beetegi ???

Ab jab jaan gaya
Sab kuch,
Jaan se jyada
Lagne lagi tu...
Tum layak nahi
Pata khud ko,
Maaf kar do mujhko...

Pyar
Beshumar karta hun,
Tum par
Pahle se jyada marta hun,
ISI liye
Tere paas aane se darta hun...

Dekh Lena aajma kar chahe
Paas nahi aa paogee,
Wahi de sakta tumhe,
Jo acha tumhare liye,
Mujhe khud se kam hi paogee...

Agar tumhe chahun,
Tumhare chahne se bhi
Tumhe na paun...
Samajh Lena pyar tha...

Tere kabil
Nahi main...
Na ho sakta kabhi....
Na pa sakta tumhe...
Na kho sakta kabhi....

Sunday, 6 April 2014

I Love me

Mujhe to
Ishq hai khud se
Ki khud main
Kho gayi hun main....
Mere har katre
Main chahat hai,
Ki khud ki
Ho gayi hun main...

Itni khud se
Mohabbat hai,
Ki main
Batla nahi sakti,
Itni shiddat se chahat hai
Ki main
Jatla nahi sakti....

Mera to pyar
Bas main hun,
Meri chahat
Mujhi se hai,
Agar kisi ke sath
Jannat ho,
Meri jannat
Mujhi se hai...

Main bahut
Toot jati hun,
Jab khud se
Rooth jati hun,
Jamane ki nahi parwah
Main khud pe
Aansu bahati hun...

Mana leti hun
Fir khud ko,
Main khud bin
Rah nahi pati....
Khud se doori
Jara si bhi
Main sah nahi pati...

Jamane ke diye
Jakhmon ko
Akele see nahi sakti,
Mujhe jarurat
Hai khud ki
Main khud bin
Jee nahi sakti...

Mujhe to naaj
Hai khud par
Mera andaaj
Anokha hai,
Akeli jeetun
Jamne ko
Itna khud par
Bharosa hai....

These lines r
Not a few lines only,
These r d Feelings of
A wonderful girl
With a suitable name
"Garima Arya"
Anil Aarya....

Khud se pyar hona chahiye...

रोज़ ख़ुद से मिलना चाहिए,  

ख़ुद पर ऐतबार होना चाहिए...  

ख़ुदी को करना हो बुलंद,  

ख़ुद से प्यार होना चाहिए...


मुझे ख़ुद से प्यार बहुत है,  

ख़ुद पर ऐतबार बहुत है,  

ज़माने की परवाह करूँ क्यों???  

मेरा व्यक्तित्व ज़माने को  

स्वीकार होना चाहिए...  

ख़ुदी को करना हो बुलंद,  

ख़ुद से प्यार होना चाहिए...


मैं केवल  

मैं नहीं हूँ,  

मेरे खुदा, तेरा वजूद  

मेरा आधार होना चाहिए...  

मेरा अपनापन  

बस मुझसे नहीं है,  

इस "मैं" में सारे जहां का  

विस्तार होना चाहिए,  

ख़ुदी को करना हो बुलंद,  

ख़ुद से प्यार होना चाहिए....


जीना 'ज़िंदगी' नहीं है  

जीने की चाहत  

पाने की ताक़त  

खोने का हौसला  

और खोकर सब फिर  

अपनेपन का अपने ही से  

व्यवहार होना चाहिए....  

ख़ुदी को करना हो बुलंद,  

ख़ुद से प्यार होना चाहिए....


– अनिल आर्य 2105

Roj khud se milna chahiye,
Khud par aitbaar hona chahiye...
Khudi ko karna ho buland,
Khud se pyar hona chahiye...

Mujhe khud se pyar bahut hai,
Khud par aitbaar bahut hai,
Jamane ki parwah Karun kyun???
Mara vyakititva jamane ko
swikar hona chahiye...
Khudi ko karna ho buland,
Khud se pyar hona chahiye...

Main keval
main nahi hun,
Mere khuda, tera vajood
Mera aadhar hona chahiye...
Mera apnapan
bas mujhse nahi hai,
Is main sare jahan ka
Vistaar hona chahiye,
Khudi ko karna ho buland,
Khud se pyar hona chahiye....

Jeena 'jindgi' nahi hai
Jeene ki chahat
Pane ki taakat
Khone ka haunsla
Or kho kar sab fir
Apnepan ka apne hi se
Vyavhaar hona chahiye....
Khudi ko karna ho buland,
Khud se pyar hona chahiye....

Anil Aarya...

De hounsla...

Ya Rab de hounsla,
Jeena tere bina
Naamumakin to nahi,
Mushkil bahut hai...
Tujhe har pal chahna,
Aasaan saa kam,
Or ise
Tumhi se chupana....
Namumkin to nahi,
Mushkil bahut hai...
Tera iskq
Blood cancer..........
Apne lahu se lad pana,
Namumkin to nahi,
Mushkil bahut hai...
Ya Rab
Mujhe de hounsla....
Tere bin zinda hun,
Jee pana ...
Namumkin to nahi,
Haan Mushkil bahut hai....

ANIL AARYA...

Kismat ki baat hai

Lutaa diya apna har katra ishq main or main neelaam ho gaya,
Bas julm itna sa mere sath ki ek bhi saksha mera na hua...
Jalte - tapte raha Suraj ke garam thapedon se,
Par andhera hi mila, mere naam ek bhi sawera na hua...
Barpaya kahar itna to bhi hum toote nahi kya kam tha ?
Zinda hun to jee bhi leta, zindgi mujhe do pal bhi ahsaas tera na hua...
Ek bhi saksha mera na hua...
Anil Aarya..

Friday, 21 March 2014

I m ur Sunshine

Tum suraj ki arunayi
Main tumse door
Jal par kreeda karti
Matra teri parchayi....

Teri parchayi ko
Tadapte dekh
Jamana Anand pata hai,
Par tujhko kab ye
Bhaata hai....

Tera kaam
Khud jal kar
Jagti roshan karna,
Kaise ye sab
mujh bin
Tu kar payega ???

Teri kiran bankar
Tera ujala sab tak
Mitra tera pahunchayega,

Waise bhi
Hum donon ka
Kaam hai chalte rahna,

Sab sahna,
Kuch na kahna,
Bas dena,
Kuch na lena....
Isi main khush rahna....

Jab tak
Tujhmen aag hai
Tera astitva rahega,
Teri kiran bankar,
Tera shasvat dost
Tere sang sang bahega....

Or haan
Mere bin tera astitva to hoga
Par pehchaan, teri main hun,
Jindgi teri jwala,
shaan teri main hun,

Or main
Mera to vajood
Tumse hai,
Tumhari har aah
Se main tadap jata hun,
Tu baichain hota hai,
Main tabahi barpata hun,

Tu suraj
Tera ehsaas main hun,
Sab tumse door,
Tere paas main hun...

Anil Aarya...

Pyar

Pyar
Is labja ka artha
Bahut gahrai main paya
Or jana
Ki bas chahna
Or chahte jana
Uski yadoon main khona
Or khoye rahna
Usko paane ko tadapna
Usko kuch bhi na kahna
Fir bas tadapte rahna
Uske saath samay bitana
Or baki sabbbbb bhool jana
Bas ye hi to pyar nahi....

Uski khushi
Uske ehsaas
Uska har sapna
Uski pasand
Uske armaan
Uske jajbaat
Uska dil
Uska pyar
Agar in sab ki
hai parvaah
Hai koi ijjat
To ye hai pyar....

Or is sab ko samajana
Or fir
Ye kahana ki haan
Hai tumse pyar ab bhi,
Or haan
Pata hai jeena hai
Tere bina,
Tere bina bhi
tu sath hai mere
Mujhme kahin,
Jo kafi hai
Mere vajood ke liye,
To ye pyar hai....

Ye chun_na
Ki kisi ke sath rah kar
Us se door rahna,
Ya to us se door rah kar
Usko khud main
Zinda rakhna,
Kya jaruri hai
Mere liye ?
Uski khushi ke liye
Apne vajood ko
Thukra dena,
Yahi to pyar hai....

Jahaan tak jaan paya
Bataya ki
Bas yahi to pyar hai,
Or jaan jaaunga
Jeevan ke safar main,
Ki pyar kya hai ????
Haan pyar haarta nahi
Rota nahi
Jhukta nahi
Toot_ta bhi nahi
Chutata bhi nahi
Bhoolta nahi
Badalta nahi
Haan pyar miltaa bhi nahi...
Par saala khushi
Bahut deta hai....
AGAR PYAR SACHA HO
TO KABHI DARD DETA NAHI...
PYAR HAI EK ONE WAY ROUTE
JO BAS DETA HAI, KUCH LETA NAHI...

Anil Aarya...

Tum par do pankatiyan...

Tumhare laayak
shabda
Milte nahi,
Ab tumhi bataao
Tum par
Kya likhun,

Dil chahtaa hai
Tum par
Ved, kuran, bible
Ya Geeta likhun....
Pyar, mohabbat, ishq
Se badhkar hai
Prem ki satta,
Sochta hun
Rishte main
Main tumhe apna
Khuda likhun....

Anil Aarya...

Thursday, 13 March 2014

Teri khushi

Mere dost
Luta dun apni dunia
Jo dikhe isme mujhe
Teri khushi,
Kuch hote hain
Jo bin kuch khoye
pa jaate hain
Sabki khushi,
Or ek main hun
Jo kho ke sab kuch apna
Kisi ke chehre pe nahi
La pata hansi....
Mere dost....

Jamaane se hamne
Kuch seekha nahi
Sikhaaya hai,
Jitni khayi dil pe chaut
Utna chehra
muskuraya hai,
Rab ke bande 'Anil' ko
Jara ye to bata
Jo chaut khayi hai to
Dukhiyon pe raham aaya hai...

Anil Aarya...

Wednesday, 12 March 2014

Nishabd...

Meri zindgi ke sabse
Haseen pal
Hote hain,
jab saath hoti hai tu...
Dil chahta hai
Tera hath thaam ke
Ghanton betha rahun
Nishabda...
Jab - jab tere labon pe
Thirkan aaye,
Un par rakh dun
Apne lab,
Or pee lun
tere andar ka sara jahar,
Or us nishabdata main
Shaur ho hamari
dhadhkanon ka...
Dil khol ke jeeun
Pyar ko, us ehsaas ko
Jo adhoora hai Tere bin,
Us jindgi ko,
Jismein har pal
Khatakti hai teri kami...
Dil karta hai
Dekhta rahun
Teri jheel si gahri
aankhon main,
Mita ke apna astitva
Kho jaun in aankhon ki
gehraiyon main kahin
Bhool ke jamane ke
sare gum
So jaun teri gaud
Main sar rakhkar...
Dil karta hai
Kahin door
pahaadon main hon
Main or tum,
Bhool jamane ko
Har pal ko jeeyen,
Har pal main ek din,
Har din main ek mahina
Har mahine main ek saal
Or saalon main saadiyon ko
Jee lene ki chaahat main
Aksar kho jaata hai
Mera dil....

Pata hai
Hain sab bevkufiyan
Mere pagal dil ki,
Maalum hai kahin na kahin
Ki Hai pyar wo cheej
Jo ho jaayegi dobara
Jeevan main kabhi,
Itni nahi to kam sahi
Hogi phir se dillagi yaro
Ya to behka lenge
Is paagal dil ko....
Dil chahta hai
Bhool jana sab kuch
Dhundhta hai
Jamaane ke gum ko
mita kar khushiyan,
Paata hai
apne gam main
Sukun,
Apni tadap main
Rahat,
Apne dukh main
Khushi,
Maayne nahi apne,
Apne liye bhi jisko
Jamana uski bhala
Soche bhi to kya ????
Dil chahta hai
Kho jana kisi gumnam
Sahar main,
Mita dena apna vajood...
Kar deta main dil ki
Sari khwahishein poori
Par koi hai
Jo hai mere
astitva se badhke...
Deta hai lagaam
Mere dussaahas ko,
Dil chahtaa hai jeena...
Tere sath
Par
Tere bina....

Anil Aarya....

Friday, 7 March 2014

Aurat

Hamara liye
Dard leti
Dard sahati
Dard main jeeti hai aurat

Har aadmi ko
Jiski hai jarurat
Wo sakshiyat hai aurat

Har samaaj ki
Aan, baan, shaan
Or samman hai aurat
Sach kahun to
Badi mahaan hai aurat

Maa, bahan, beti
Or hamsafar bankar
Rishton ko naye aayaam
Deti hai aurat,
Samaaj main
ghut ghut kar Jeeti,
Hamare diye ghaav
Nishabda seeti hai aurat...

Tahe dil se
Tere har rishte ko
Nibhayenge,
Jo cheena hai samaaj ne
Tera matrashakti ka pad
Sa_samaan wapis dilayenge....

Anil Aarya...

Friday, 28 February 2014

Vairagi

Main vairagi
Veetragi
Jamane ke sab bandhan
Tod aaya hun,
Main apna
Sara jahaan
Peeche chhod aaya hun...

Na koi dukh
Na pachtava koi
Koi moh maya nahi
Na bhulava koi
Jamane se muh mod aaya hun,
Main vairagi....

Teri bhakti
Meri shakti
Teri chahat
Meri mohabbat
Ye sab dunia walon se main
Bol aaya hun,
Main vairagi.....

Aaj imtihaan ki ghadi hai
Mujhko jamane ki padi hai
Ek cheej sab se badi hai
Us ki khaatir
Sab cheejon ko
Chhod aaya hun,
Main vairagi....

Mere antahkaran se pucho
Isme aaj ujala bahut hai
Jamane ki parwah karta hun
Isne mujhe sambhala bahut hai
Isi ki samriddhi ki khaatir
Khud se nata tod aaya hun,
Main vairagi.....

Vairagi....

Thursday, 27 February 2014

Kahin door...

Jee karta hai
Aaj aazaadi, Pa Jane ko,
Tod deh-dhara ke bandhan
Panchtatva mil Jane ko....

Jee karta hai
Chhod sabhi ko
Chal nikalun,
Dam ghut_ta hai is dunia,
Main aaj
Abhi
Is pal nikalun....

Pahunch jaun us jagah
Jahaan meri reet sahi hogi,
Toot jaye chahe khud koi
Dil todne ki reet nahi hogi....

Jamaane walo aao
Apna zor aajmaa lo
Kal mat kahna main hara tha
Apni fauj bula lo....

Ab jana hai door kahin
Is durgam paaraawaar se,
Prabhu jo tum ho, shakti do,
Nikal paaun
moh maya ke vyaapaar se....

Aaj kahin door jana chahta hun,
Apna bhaagya
Fir se aajmana chahta hun.....
Dunia ke bandhan se
Paar pana chahta hun.......
Mujhe na roko
Jamane walo, main bhi
Muskurana chahta hun.....

Anil Aarya...

Destiny

My destiny
Makes me run
Around and around,
Every time
I found a new plot
A new Ground....
A new ground
Without boundary,
Without any sound.....
I make Noises
Carries myself
Like a hound....
Run here and there
But
Nothing to found.....
Nothing to found.......
My destiny
Makes me run
Around and around.....

Anil Aarya...

Wednesday, 26 February 2014

Dil

Dil
Jab toot_ta hai
Dard
bahut hota hai
Or
Aawaj
Jara si bhi nahi...

Ae mere khuda
Ye kaise
dard ka aagaaj hai
Hai beintihaan dard
Nahi hoton pe aawaj hai....
Ankhen sunsaan
Dil veeraan
Kaisa ye imtihaan hai....

Itnaaaaaa dard..........
Bada bedard,
Tu mere khuda......
Kam se kam
Bata gunaah.....
Ek kaam kar
Ya to mujhe maar de,
Ya fir aane de pralaya
Mera dard
Ankhon main utaar de........
Bahut dinon se soya
Nahi hun main,
Ghut ghut Mara hun
Khulkar roya nahi hun main....

Anil Aarya...