Monday, 27 April 2026

वर्षगाँठ

पच्चीस वर्षों का यह साथ,

केवल समय नहीं, एक साधना है।

दो अलग रास्तों का मिलकर

एक सुंदर मार्ग बन जाना है।


मामा, आपसे हमने सीखा,

कैसे धैर्य से जिम्मेदारी निभाई जाती है।

और मामी, आपकी मुस्कान ने बताया,

कैसे घर को खुशियों से महकाया जाता है।


कभी संघर्षों की धूप रही, तो कभी खुशियों की छाँव,

पर आप दोनों के कदम कभी डगमगाए नहीं।

एक-दूजे पर विश्वास की वह अटूट डोर ही थी,

जिसने परिवार के आँगन को बिखरने दिया नहीं।


आज इस खास पड़ाव पर,

हम बस इतना ही कहना चाहते हैं,

आप दोनों हमारा अभिमान हैं, हमारा संबल हैं,

इस घर की प्रतिष्ठा और संस्कारों का कलश हैं।


यह साथ चाँदनी की तरह शीतल बना रहे,

माथे का सिंदूर और चेहरे का तेज अमर रहे।

हमारी दुआओं में बस आपका ही नाम है,

आपकी जोड़ी को हमारा सादर प्रणाम है।


पच्चीस वर्ष का यह सफ़र, पावन हुआ अनुष्ठान है,

मामा-मामी का यह प्रेम , कुल का बढ़ाता मान है।

अक्षय रहे अनुराग यह, गंगा-सदृश निर्मल बहे,

सौभाग्य का यह सूर्य अब, नभ में निरंतर ही रहे।


​मामा बने संबल सदा, मामी बनीं रहें ममतामयी,

संसार की हर सुख-छटा, आँगन खड़ी हो नयी-नयी।

प्रतिष्ठा और विश्वास का, स्तंभ यह अविचल रहे,

सद्भाव और सत्कार की, सरिता सदा कल-कल बहे।


​अर्पण हमारा प्रेम है, चरणों में सादर वंदना,

हो पूर्ण जीवन की सभी, मन की मधुरतम कल्पना।

रजत प्रभा यह स्वर्ण बन, चहुँ ओर नित बिखरा करे,

ईश की करुणा-कृपा, इस युगल पर सदा बरसा करे।


​शादी की 25वीं वर्षगाँठ पर आप दोनों को अनंत शुभकामनाएँ, आपका पुत्र : अनिल आर्य...


Monday, 20 April 2026

भ्रातृ-वन्दन एवं भावपूर्ण विदाई

 भ्रातृ-वन्दन एवं भावपूर्ण विदाई

आदरणीय भ्राता वीरेंद्र आर्य जी,

​शब्द मौन हैं, हृदय भाव-विह्वल है और पलकें स्मृतियों के स्नेह से भीगी हुई हैं। आज आपकी इस गौरवशाली सेवानिवृत्ति के अवसर पर, मैं स्वयं को एक विचित्र द्वंद्व में पा रहा हूँ। एक ओर आपके यशस्वी कार्यकाल की पूर्णता का गर्व है, तो दूसरी ओर आपके सान्निध्य के उस अनमोल अध्याय के औपचारिक समापन की टीस।

​आदरणीय आर्यश्रेष्ठ,

​आपने राजनीति विज्ञान के सिद्धांतों को केवल कक्षाओं में नहीं पढ़ाया, बल्कि अपने जीवन के व्यवहार में उतारकर दिखाया। आपकी अक्षुण्ण सत्यनिष्ठा और हिमोज्ज्वल श्वेत चरित्र मेरे लिए सदैव एक पवित्र प्रकाश-स्तंभ रहे हैं। "आर्य" नाम की जो गरिमा आपने अपने अनुपम परिश्रम से बढ़ाई है, वह हम सबके लिए कुल-गौरव है।

भीगी पलकों से कुछ शब्द:

विदाई की यह वेला है, पर स्नेह का बंधन अटूट है,

कर्तव्यों से निवृत्ति है, पर आत्मीयता की कहाँ छूट है?

राजनीति के हर शास्त्र को, आपने आचरण से संवारा है,

हे अग्रज! आपके व्यक्तित्व ने, हर हृदय को पुकारा है।


​संस्थान के गलियारों में आपकी उपस्थिति, वह अनुशासित मुस्कान और हर कार्य के प्रति आपकी वह अद्वितीय कर्मपरायणता... इन सबकी कमी को कोई भर नहीं पाएगा। आपने केवल सेवा नहीं की, आपने हम सबके भीतर 'श्रेष्ठता' के बीज बोए हैं।

मंगलकामना:

​मैं (अनिल आर्य) ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि निवृत्ति के पश्चात का यह नूतन सवेरा आपके जीवन में असीम शांति, उत्तम स्वास्थ्य और चिर-आनन्द लेकर आए। आप जहाँ रहें, अपनी ज्ञानमयी दीप्ति से हमें आलोकित करते रहें।

विदाई तो एक औपचारिकता है, आप तो सदैव मेरे हृदय के सिंहासन पर विराजमान रहेंगे।

अश्रुपूरित नेत्रों एवं सजल श्रद्धा के साथ,

आपका अनुज,

अनिल आर्य

Saturday, 4 April 2026

धनखड़

विदाई अभिनंदन: एक युग का समापन
​शब्दों के जादूगर, अनुशासन की पहचान, धनखड़ जी, आप हैं इस उपवन की शान। अंग्रेजी की बारीकियों को आपने सहज बनाया,
साहित्य के सागर को हर दिल में है बसाया।

​किताबों के पन्नों से निकलकर, जीवन जीना सिखाया, कठिन रास्तों पर भी चलना, हमें आपने बताया। एक कुशल प्रशासक और एक कोमल मन के स्वामी,
आपके नेतृत्व में मिली, इस संस्थान को नई सलामी।

​वो शेक्सपियर की पंक्तियाँ और वो ग्रामर का सार, आपकी क्लास में दिखता था, ज्ञान का अपरंपार भंडार। कभी डांटा पिता की तरह, कभी दोस्त बन हाथ बढ़ाया,
हर छात्र ने आपमें, एक सच्चा मार्गदर्शक पाया।

​आज विदाई की इस बेला में, आँखें थोड़ी नम हैं, पर आपकी दी हुई सीख, खुशियों का मरहम है। सूरज कभी ढलता नहीं, बस नई सुबह लाता है,
आपका ये नया सफर, सुख-समृद्धि की गाथा सुनाता है।

​स्वस्थ रहें, प्रसन्न रहें, यही हमारी दुआ है, आपकी मेहनत से ही, ये गुलशन आज खिला है। सुरेंद्र धनखड़ जी, आपका नाम गर्व से लिया जाएगा,
ये स्कूल, ये गलियारे, इनकी महक और आपकी मेहनत से, हर छात्र अपनी समृति में आपको पाएगा।

अनिल आर्य...