सीने से लगा ले मुझको
और अपने सारे गम
मेरी रूह मैं उतार दे ,
अपने आंसुओं से भिगो दे मुझको
मेरे मैले उपमान संवार दे
नए उपमान गढ़ूं मैं
मेरे अनंत को अनंत विस्तार दे ,
मत रूठ मुझसे किस्मत मेरी
बस इतना कर उपकार दे
हर्षित कर अपना तन-मन-जीवन
जो मुझको ख़ुशी अपार दे,
सीने से लगा ले मुझको
और अपने सारे गम मेरी
रूह मैं उतार दे …
अनिल आर्य…
और अपने सारे गम
मेरी रूह मैं उतार दे ,
अपने आंसुओं से भिगो दे मुझको
मेरे मैले उपमान संवार दे
नए उपमान गढ़ूं मैं
मेरे अनंत को अनंत विस्तार दे ,
मत रूठ मुझसे किस्मत मेरी
बस इतना कर उपकार दे
हर्षित कर अपना तन-मन-जीवन
जो मुझको ख़ुशी अपार दे,
सीने से लगा ले मुझको
और अपने सारे गम मेरी
रूह मैं उतार दे …
अनिल आर्य…