मेरा ये ब्लॉग मेरे मन के कोमल उद्गारों से विरचित है , आप सब इस पर सादर आमंत्रित हैं , अगर कोई सलाह देना चाहें तो कृतार्थ करें , आपका साथी अनिल आर्य...
Monday, 13 September 2021
Friday, 3 September 2021
गुरूजी
Monday, 10 May 2021
कोरोना को क्या रोना?
Friday, 7 May 2021
ख़ामोशी
Tuesday, 30 March 2021
परिवार
आज शहर में रहते हैं,
गाँव खो गए,
आधुनिक समाज है,
सामाजिकता खो गई,
आमदनी -पैसा है, नौकरी-व्यापार है,
भागदौड़ और भगदड़ भी है,
बहुत कुछ पा लिया है,
अब गाड़ी तो है,
पर साथ चलने वाले यार खो दिए,
हम अब पहले से बहुत सभ्य हो गए हैं,
हाँ पर सभ्यता तो खो गई है,
संस्कार टेलीवीजन पर आते हैं,
जीवन में नहीं,
मिठाई तो खूब खाते हैं अब,
रिश्तों में पहले जैसी मिठास नहीं,
विश्वास की कविता सुनते हैं,
किसी पर विश्वास नहीं,
जीवन का तरीका बदल गया,
स्टेटस अब सिर्फ व्हाट्सप्प पर है,
और आधार का तो कार्ड ही बनता है,
जीवन का कोई आधार नहीं,
हाँ नया बहुत कुछ पा लिया,
पर
बचपन के यार खो गए,
आपसी प्यार खो गए,
अब और तो क्या कहूं,
फ़ोन हाथ में रहता है,
परिवार खो गए...
अनिल आर्य...