Monday, 25 August 2014

आवाज़ मैं न दूँगा

कल मेरा मौन
       नहीं सुना तुमने
आज आवाज़
          मैं न दूँगा...
मेरा आगाज था सुनहरा
         घर ख़ुद का जला बैठा
नहीं होली की अब तमन्ना
        अंजाम मैं न दूँगा...
कल मेरा मौन
       नहीं सुना तुमने
आज आवाज़
          मैं न दूँगा...

अनिल आर्य...

Sunday, 24 August 2014

हिंदी दिवस

UPSC व MODI को समर्पित

देश बेच दिया
अप्रत्यक्ष गद्दारौं ने,
काश ख़रीदार ऐ मुल्क
कोई हिंदी होता...
मोदी देगा सुनहरा भाषण
हिंदी दिवस पर,
काश हिंदी के जनाजे पे भाषणकर्ता
कोई प्रत्यक्ष फिरन्गी होता...

अनिल आर्य...

Saturday, 9 August 2014

रक्षा-बंधन

मेरी बहनों को रक्षा-बंधन के पावन
अवसर पर समर्पित चंद पंक्तियां...

भाई-बहन का अप्रतिम बंधन
स्नेह-प्रीति का मांगलिक वंदन
रक्षा-हेतु समर्पित हो तन-मन
हृदय-पावन हो जाए जन-जन
है ऐसा पवित्र-पर्व ये रक्षा-बंधन....

अनिल आर्य...

Wednesday, 6 August 2014

सौभाग्य

देखे थे जो सपने
रात को,
सुबह को उठकर
तोड़ दिए,
मैं दिये जलाता था
हर रस्ते,
अपने आँगन अँधियारे
छोड़ दिए...

जिस जिसको दिखाया
रस्ता मैंने,
नेकी की जगह
बदी मिली,
जिस जिसको समेटा
बिखरने से,
सबकी बद्दुआएँ
सधी मिली...

रात रात भर
जगे थे,
जिन्हें हम
सुलाने को,
पूरी ताक़त
लगा दिए वो,
मेरी नींद
उड़ाने को...

एक यही सौभाग्य
हासिल हमको,
की जीवन मेँ
दुर्भाग्य मिला,
जिस जिस रस्ते
था मैं दौड़ा,
वो हरदम मंजिल से
दूर खुला...

इस तरह
बाल सफेद किए,
जो भटके रस्ते
तो सैर किए,
जानी जन जन
की सच्चाई,
आये रस्ते बिन
देर किए...

जो पहुँच जाता मंजिल
सीधे सीधे,
तो मज़ा क्या होता
जीने मेँ,
आख़िर इन्सा वो
क्या इन्सा,
जो दर्द न पाले
सीने मेँ...

अनिल आर्य...