Wednesday, 23 July 2014

मुस्कान

मुझे परवाह नहीं
ग़म के बादल छटें कब,
ये चेहरा सदा
मुस्कुराता रहेगा...
इम्तिहानों - आजमाइशों
का अजब सिलसिला
जो जीता तो हरदम,
वो पाता रहेगा...
हारना नहीं आता
है लड़ना मुकद्दर,
ये समय क्या हमें
आज़माता रहेगा...
जीना
ज़हर पीना
जब ख्वाहिशों मॆं था शामिल,
तो
ज़िंदगी को मुकद्दर
हिलाता रहेगा...
मरना जो चाहो
तो मरने न देगा,
विष अमृत बनकर
जिलाता रहेगा,
अनिल जीने की कोशिश
न करना भूलकर भी,
विष अंदर ही अंदर
गलाता रहेगा...
मेरे मालिक
तू लाख तक़लीफ़ों का
मुझे सिलसिला दे,
ये चेहरा सदा
मुस्कुराता रहेगा...

अनिल आर्य...

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