हद है कि
मेरे प्यार की
हद नहीं जानता
समन्दर मेरा …
बिखेर देता है
तेरी जरुरत भर
का प्यार
इन साहिलों पर …
इसीलिए
न जान पाए
गहराई
मेरे इश्क़ की ,
मेरे अन्दर उतरने की
जरुरत न पड़ी
तुमको कभी …
अनिल आर्य…
मेरे प्यार की
हद नहीं जानता
समन्दर मेरा …
बिखेर देता है
तेरी जरुरत भर
का प्यार
इन साहिलों पर …
इसीलिए
न जान पाए
गहराई
मेरे इश्क़ की ,
मेरे अन्दर उतरने की
जरुरत न पड़ी
तुमको कभी …
अनिल आर्य…
No comments:
Post a Comment