Friday, 7 May 2021

ख़ामोशी

थोड़ी सी ही सही, पर अब भी हसरतें क्यूँ हैं????
मेरे हिस्से में बस नफरतें ही नफरतें क्यूँ हैं???
शब्द जुबां पे लाने से पहले कितना सोचा जाए???
गलती से कुछ बोल दिया तो खुदको कितना नौचा जाए???
ख़ामोशी को लफ्जों का कफ़न बना देना ही अच्छा है,
ख़ामोशी को कोई गलत समझे तो साहेब क्या किया जाए????
बड़ों को, छोटों की सलाह की आदत ड़ाल लेनी चाहिए,
कोई अगर सही को ग़लत कहे, गलती मान लेनी चाहिए????
सलाह किसी अपने को देना भी अब गुनाह है साहेब,
सलाह न देने की सलाह ख़ुद ही मान लेनी चाहिए???
मुसीबत में हर किसी का साथ दो जरूरी बहुत है,
ख़ुद की मुसीबत हँस कर टाल देनी चाहिए???
शख्स की शख्सियत ही क्या उभरेगी जो सभी साथ दें,
अकेला भुगत अपने हिस्से का गम, अपनेपन की लकीर दुःख में निकाल देनी चाहिए???
जिसको पैमाने पे माप लें, वो गम नहीं पालते हम,
फर्क नहीं पड़ता, समुन्द्र से बाल्टी निकाल लेनी चाहिए???
बाँटने से फैलता नहीं प्यार हवा में अब तो,
कमी अब ख़ुद में अनिल निकाल लेनी चाहिए???
अनिल आर्य...

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