कल मेरा मौन
नहीं सुना तुमने
आज आवाज़
मैं न दूँगा...
मेरा आगाज था सुनहरा
घर ख़ुद का जला बैठा
नहीं होली की अब तमन्ना
अंजाम मैं न दूँगा...
कल मेरा मौन
नहीं सुना तुमने
आज आवाज़
मैं न दूँगा...
अनिल आर्य...
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