Monday, 20 April 2026

भ्रातृ-वन्दन एवं भावपूर्ण विदाई

 भ्रातृ-वन्दन एवं भावपूर्ण विदाई

आदरणीय भ्राता वीरेंद्र आर्य जी,

​शब्द मौन हैं, हृदय भाव-विह्वल है और पलकें स्मृतियों के स्नेह से भीगी हुई हैं। आज आपकी इस गौरवशाली सेवानिवृत्ति के अवसर पर, मैं स्वयं को एक विचित्र द्वंद्व में पा रहा हूँ। एक ओर आपके यशस्वी कार्यकाल की पूर्णता का गर्व है, तो दूसरी ओर आपके सान्निध्य के उस अनमोल अध्याय के औपचारिक समापन की टीस।

​आदरणीय आर्यश्रेष्ठ,

​आपने राजनीति विज्ञान के सिद्धांतों को केवल कक्षाओं में नहीं पढ़ाया, बल्कि अपने जीवन के व्यवहार में उतारकर दिखाया। आपकी अक्षुण्ण सत्यनिष्ठा और हिमोज्ज्वल श्वेत चरित्र मेरे लिए सदैव एक पवित्र प्रकाश-स्तंभ रहे हैं। "आर्य" नाम की जो गरिमा आपने अपने अनुपम परिश्रम से बढ़ाई है, वह हम सबके लिए कुल-गौरव है।

भीगी पलकों से कुछ शब्द:

विदाई की यह वेला है, पर स्नेह का बंधन अटूट है,

कर्तव्यों से निवृत्ति है, पर आत्मीयता की कहाँ छूट है?

राजनीति के हर शास्त्र को, आपने आचरण से संवारा है,

हे अग्रज! आपके व्यक्तित्व ने, हर हृदय को पुकारा है।


​संस्थान के गलियारों में आपकी उपस्थिति, वह अनुशासित मुस्कान और हर कार्य के प्रति आपकी वह अद्वितीय कर्मपरायणता... इन सबकी कमी को कोई भर नहीं पाएगा। आपने केवल सेवा नहीं की, आपने हम सबके भीतर 'श्रेष्ठता' के बीज बोए हैं।

मंगलकामना:

​मैं (अनिल आर्य) ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि निवृत्ति के पश्चात का यह नूतन सवेरा आपके जीवन में असीम शांति, उत्तम स्वास्थ्य और चिर-आनन्द लेकर आए। आप जहाँ रहें, अपनी ज्ञानमयी दीप्ति से हमें आलोकित करते रहें।

विदाई तो एक औपचारिकता है, आप तो सदैव मेरे हृदय के सिंहासन पर विराजमान रहेंगे।

अश्रुपूरित नेत्रों एवं सजल श्रद्धा के साथ,

आपका अनुज,

अनिल आर्य

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