पच्चीस वर्षों का यह साथ,
केवल समय नहीं, एक साधना है।
दो अलग रास्तों का मिलकर
एक सुंदर मार्ग बन जाना है।
मामा, आपसे हमने सीखा,
कैसे धैर्य से जिम्मेदारी निभाई जाती है।
और मामी, आपकी मुस्कान ने बताया,
कैसे घर को खुशियों से महकाया जाता है।
कभी संघर्षों की धूप रही, तो कभी खुशियों की छाँव,
पर आप दोनों के कदम कभी डगमगाए नहीं।
एक-दूजे पर विश्वास की वह अटूट डोर ही थी,
जिसने परिवार के आँगन को बिखरने दिया नहीं।
आज इस खास पड़ाव पर,
हम बस इतना ही कहना चाहते हैं,
आप दोनों हमारा अभिमान हैं, हमारा संबल हैं,
इस घर की प्रतिष्ठा और संस्कारों का कलश हैं।
यह साथ चाँदनी की तरह शीतल बना रहे,
माथे का सिंदूर और चेहरे का तेज अमर रहे।
हमारी दुआओं में बस आपका ही नाम है,
आपकी जोड़ी को हमारा सादर प्रणाम है।
पच्चीस वर्ष का यह सफ़र, पावन हुआ अनुष्ठान है,
मामा-मामी का यह प्रेम , कुल का बढ़ाता मान है।
अक्षय रहे अनुराग यह, गंगा-सदृश निर्मल बहे,
सौभाग्य का यह सूर्य अब, नभ में निरंतर ही रहे।
मामा बने संबल सदा, मामी बनीं रहें ममतामयी,
संसार की हर सुख-छटा, आँगन खड़ी हो नयी-नयी।
प्रतिष्ठा और विश्वास का, स्तंभ यह अविचल रहे,
सद्भाव और सत्कार की, सरिता सदा कल-कल बहे।
अर्पण हमारा प्रेम है, चरणों में सादर वंदना,
हो पूर्ण जीवन की सभी, मन की मधुरतम कल्पना।
रजत प्रभा यह स्वर्ण बन, चहुँ ओर नित बिखरा करे,
ईश की करुणा-कृपा, इस युगल पर सदा बरसा करे।
शादी की 25वीं वर्षगाँठ पर आप दोनों को अनंत शुभकामनाएँ, आपका पुत्र : अनिल आर्य...
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