Wednesday, 6 May 2026

जेन जी

सुबह आँख खुलती नहीं, स्क्रीन जलती है।
अंगूठा पहले जागता है, आदमी बाद में।

देशभक्ति अब पंद्रह सेकंड की रील है,
ज्ञान व्हाट्सऐप फॉरवर्ड में पैक है,
डॉक्टर गूगल है, वकील यूट्यूब कमेंट है,
और भगवान भी ट्रेंड करे तो ही भगवान है।

हम स्टोरी में पेड़ लगाते हैं,
AC सोलह पर चला कर पर्यावरण बचाते हैं,
दिल्ली की धुंध में मास्क ढूंढते हैं,
पर AQI से ज्यादा फॉलोअर्स गिनते हैं।

EMI पर फोन, EMI पर जूते,
EMI पर वो मुस्कान जो किस्तों में हँसती है।
बच्चा कोटा में है, बाप कोटा में नहीं,
पर दोनों एक ही रेस में थके हुए हैं।

मोहब्बत अब बायो में अपडेट होती है,
'इन अ रिलेशनशिप' से शुरू, 'मूव ऑन' रील पर खत्म।
डेट पर दो लोग, तीन फोन,
एक उसका, एक मेरा, एक फोटो खींचने वाला।
सुबह 'गुड मॉर्निंग जानू', रात 'तुम बदल गए हो',
वफा फुल चाहिए, पर ऑप्शन भी खुले रखने हैं,
ब्रेकअप अब दुख नहीं, कंटेंट है।

शादी अब फंक्शन नहीं, प्रोडक्शन है,
प्री-वेडिंग में प्यार, हल्दी में ड्रोन,
मेहमान कम, कैमरामैन ज्यादा,
और आशीर्वाद की जगह 'टैग कर देना भैया'।

माँ-बाप व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हैं,
बेटा इंस्टा का टॉपर है,
दोनों एक दूसरे को ज्ञान भेजते हैं,
दोनों ही ब्लू टिक के बाद भी अनरीड हैं।

ऑफिस में हम हसल करते हैं,
लिंक्डइन पर ग्रेटफुल लिखते हैं,
बॉस को स्टोरी से हाइड करते हैं,
और सैलरी को महीने के आखिर में ढूंढते हैं।

खबर अब खबर नहीं, सीरियल है,
एंकर चीखता है, हम चाय पीते हैं,
देश हर रात टीवी पर बचता है,
सुबह मेट्रो में फिर धक्के खाता है।

सच को फैक्ट-चेक चाहिए,
झूठ को बस अच्छा बैकग्राउंड म्यूजिक।
हर कोई आहत है, हर कोई आहत करता है,
हर कोई सलाह देता है, सुनता कोई नहीं।

ये है 2026 का आदमी,
जेब में दुनिया, हाथ में पावरबैंक,
दिल में सन्नाटा, और टाइमलाइन पर शोर,
खुद से अनफॉलो, दुनिया को फॉलो।

अनिल आर्य...

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