कौन हूँ मैं न मालूम जो मालूम तो एक खबर
की जो भी हूँ जैसा भी हूँ कुछ ख़ास नहीं हूँ मैं
जो छू जाए मन को वो एहसास नहीं हूँ मैं
किसी राधा की प्यास मीरा का विश्वास
और उर्मिला का वनवास नहीं हूँ मैं
हूँ कोई संग्राम विजय का या कि महासमर अनश्वर
कोई संत्रास नहीं हूँ मैं
हारा मुसाफिर या विश्वविजेता सिकंदर
कुछ भी हो सकता हूँ खुद के लिए
पर किसी और के लिए झूठी आस नहीं हूँ मैं
जीवन सफ़र मैं जो बुझ जाए
वो प्यास नहीं हूँ मैं
है मालूम कुछ ख़ास नहीं हूँ मैं
भीष्म नहीं न सही पर देवदास नहीं हूँ मैं
जो हूँ वो एक कड़वा सच मीठी सी झूठी सी आस नहीं हूँ मैं
सुख का नहीं न सही
दुःख का भी एहसास नहीं हूँ मैं
है मालूम मुझे कुछ ख़ास नहीं हूँ मैं
मिल गया बिन मांगे फ़रियाद की तरह
जो हाथ उठा मांगी हो दर-दर
वो फ़रियाद नहीं हूँ मैं
हूँ उजड़ा पतझड़ घोर-भयानक ,
जिसे देख पक्षी गाएं
जिसे देख पुरवा आये
जिसे देख हो मदमस्त कली वो मधुमास नहीं हूँ मैं
है मालूम मुझे बस इतना के कुछ ख़ास नहीं हूँ मैं
पावन निर्झर गंगा का स्नान नहीं हूँ मैं
हो आर्यभूमि जो पवित्र
वो हिंदुस्तान नहीं हूँ मैं
हो पाक बहुत ही जो
वो पाकिस्तान नहीं हूँ मैं
मेरे मन में थी कभी जो
वो शान नहीं हूँ मैं
हो महत्ती गरिमा जिसमे
वो पहचान नहीं हूँ मैं
कभी कभी तो लगता है इंसान नहीं हूँ मैं
खुद में झाँकू जब जब जानूं शेतान नहीं हूँ मैं
जहाँ न कोई आये जाए बियाबान नहीं हूँ मैं
सुन सरले तू ध्यान लगा भगवान नहीं हूँ मैं
तेरे मन की सब मैं जानूं अनजान नहीं हूँ मैं
मालूम बहुत ही ख़ास बात
के कुछ ख़ास नहीं हूँ मैं
अनिल आर्य
की जो भी हूँ जैसा भी हूँ कुछ ख़ास नहीं हूँ मैं
जो छू जाए मन को वो एहसास नहीं हूँ मैं
किसी राधा की प्यास मीरा का विश्वास
और उर्मिला का वनवास नहीं हूँ मैं
हूँ कोई संग्राम विजय का या कि महासमर अनश्वर
कोई संत्रास नहीं हूँ मैं
हारा मुसाफिर या विश्वविजेता सिकंदर
कुछ भी हो सकता हूँ खुद के लिए
पर किसी और के लिए झूठी आस नहीं हूँ मैं
जीवन सफ़र मैं जो बुझ जाए
वो प्यास नहीं हूँ मैं
है मालूम कुछ ख़ास नहीं हूँ मैं
भीष्म नहीं न सही पर देवदास नहीं हूँ मैं
जो हूँ वो एक कड़वा सच मीठी सी झूठी सी आस नहीं हूँ मैं
सुख का नहीं न सही
दुःख का भी एहसास नहीं हूँ मैं
है मालूम मुझे कुछ ख़ास नहीं हूँ मैं
मिल गया बिन मांगे फ़रियाद की तरह
जो हाथ उठा मांगी हो दर-दर
वो फ़रियाद नहीं हूँ मैं
हूँ उजड़ा पतझड़ घोर-भयानक ,
जिसे देख पक्षी गाएं
जिसे देख पुरवा आये
जिसे देख हो मदमस्त कली वो मधुमास नहीं हूँ मैं
है मालूम मुझे बस इतना के कुछ ख़ास नहीं हूँ मैं
पावन निर्झर गंगा का स्नान नहीं हूँ मैं
हो आर्यभूमि जो पवित्र
वो हिंदुस्तान नहीं हूँ मैं
हो पाक बहुत ही जो
वो पाकिस्तान नहीं हूँ मैं
मेरे मन में थी कभी जो
वो शान नहीं हूँ मैं
हो महत्ती गरिमा जिसमे
वो पहचान नहीं हूँ मैं
कभी कभी तो लगता है इंसान नहीं हूँ मैं
खुद में झाँकू जब जब जानूं शेतान नहीं हूँ मैं
जहाँ न कोई आये जाए बियाबान नहीं हूँ मैं
सुन सरले तू ध्यान लगा भगवान नहीं हूँ मैं
तेरे मन की सब मैं जानूं अनजान नहीं हूँ मैं
मालूम बहुत ही ख़ास बात
के कुछ ख़ास नहीं हूँ मैं
अनिल आर्य
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