बात का रुख बदल देते हैं लोग चेहरा देख कर,
हम तो सीधी बात करते हैं खफा कोई भी हो,
जुदाई का गम नहीं करते यारो,
चाहे जुदा कोई भी हो,
ग़र होगी बात मैं बात तो कोई बात तो होगी,
ग़र बात मैं बात नहीं तो फिर बात कोई भी हो।।।
बुलन्द हाथों मैं जन्जीर डाल दी यारो ,
अजीब रस्म चली है दुआ न मांगने की,
हर दुआ मैं उस मुसाफिर की ख़ुशी है,
तू सदा दे ,
तो क्या जरुरत है मुझे,
सदा मांगने की,
फिर चाहे मेरे जज़्बात कोई भी हो।।।
जिन्दगी यूँ तो जीना मेरे काबिल न है गरिमा का साथ तो हो,
बातों मैं उसके भी कोई बात तो हो,
मैं नहीं चाहता की मुझ से,
पर खुद से उसकी बात तो हो,
उस गरिमा से जिस मैं गरिमा बहुत है,
गरिमा की मुलाकात तो हो,
फिर नहीं चाहता संग मेरे की चाहे उसके साथ कोई भी हो।।।
सिर्फ मांगी दोस्ती,
दे सकता हूँ भी तो अब वो भी है दोस्ती,
कुछ बचा नहीं बाकी,
पिला कुछ साकी,
जीवन की दास्ताँ मैं दोस्ती की बात तो हो,
जो भी हो उसमे वो होने का जज़्बात तो हो,
हाँ जो दूंगा वो सच,
चाहे उसके मकामात कोई भी हो।।।।
कि कब तक मैं तेरे साथ हूँ तू ये पूछे तो ज़रा,
की जब तक तेरी जिन्दगी है या जब तक कि मैं न मरा ,
किया जो तुने या की जो तू करे,
भरे कौन ये तू पूछे तो जरा,
की तू कर मर्जी अपनी, तेरा है कोई जो भर देगा हर करे को तेरा,
कि दोस्ती की कीमत पे तू लिख कुछ भी,
की कीमती तेरी दोस्ती मैं विश्वास मेरा,
न छोडूँ साथ तेरा कीमत कोई भी हो।।।
गरिमा के साथ जीने का न मकसद मर तो सकूँ साथ गरिमा के,
चाहे रिश्ता कुछ बात कोई भी हो,
मुलाकात हो,
चाहे हालात कोई भी हो,
अब मुमकिन नहीं लौट सकूँ पीछे चाहे जज्बात कोई भी हो,
दोस्त और दोस्ती,
निभाना फितरत मैं मेरी,
चाहे मेरी औकात कोई भी हो,
कुर्बान कर दूँ हर अपने मन की बात कोई भी हो।।।
अनिल आर्य
हम तो सीधी बात करते हैं खफा कोई भी हो,
जुदाई का गम नहीं करते यारो,
चाहे जुदा कोई भी हो,
ग़र होगी बात मैं बात तो कोई बात तो होगी,
ग़र बात मैं बात नहीं तो फिर बात कोई भी हो।।।
बुलन्द हाथों मैं जन्जीर डाल दी यारो ,
अजीब रस्म चली है दुआ न मांगने की,
हर दुआ मैं उस मुसाफिर की ख़ुशी है,
तू सदा दे ,
तो क्या जरुरत है मुझे,
सदा मांगने की,
फिर चाहे मेरे जज़्बात कोई भी हो।।।
जिन्दगी यूँ तो जीना मेरे काबिल न है गरिमा का साथ तो हो,
बातों मैं उसके भी कोई बात तो हो,
मैं नहीं चाहता की मुझ से,
पर खुद से उसकी बात तो हो,
उस गरिमा से जिस मैं गरिमा बहुत है,
गरिमा की मुलाकात तो हो,
फिर नहीं चाहता संग मेरे की चाहे उसके साथ कोई भी हो।।।
सिर्फ मांगी दोस्ती,
दे सकता हूँ भी तो अब वो भी है दोस्ती,
कुछ बचा नहीं बाकी,
पिला कुछ साकी,
जीवन की दास्ताँ मैं दोस्ती की बात तो हो,
जो भी हो उसमे वो होने का जज़्बात तो हो,
हाँ जो दूंगा वो सच,
चाहे उसके मकामात कोई भी हो।।।।
कि कब तक मैं तेरे साथ हूँ तू ये पूछे तो ज़रा,
की जब तक तेरी जिन्दगी है या जब तक कि मैं न मरा ,
किया जो तुने या की जो तू करे,
भरे कौन ये तू पूछे तो जरा,
की तू कर मर्जी अपनी, तेरा है कोई जो भर देगा हर करे को तेरा,
कि दोस्ती की कीमत पे तू लिख कुछ भी,
की कीमती तेरी दोस्ती मैं विश्वास मेरा,
न छोडूँ साथ तेरा कीमत कोई भी हो।।।
गरिमा के साथ जीने का न मकसद मर तो सकूँ साथ गरिमा के,
चाहे रिश्ता कुछ बात कोई भी हो,
मुलाकात हो,
चाहे हालात कोई भी हो,
अब मुमकिन नहीं लौट सकूँ पीछे चाहे जज्बात कोई भी हो,
दोस्त और दोस्ती,
निभाना फितरत मैं मेरी,
चाहे मेरी औकात कोई भी हो,
कुर्बान कर दूँ हर अपने मन की बात कोई भी हो।।।
अनिल आर्य


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