मेरे जीवन के आधार
और प्राणों के पारावार
स्नेह निमंत्रण करो स्वीकार
जरुरत है, भेजो थोडा प्यार…
आपकी महत्ता जानूं मैं
मुझको जीवन का दान दिया
अपने लघुत्तम जीवन मैं
रिश्तों को महत्तम सम्मान दिया
आज उन्ही रिश्तों को है दरकार
जरुरत है, भेजो थोडा प्यार…
अपनी गोद मैं लेकर जब
प्यार से दुलराया होगा
नावाकिफ इस संसार से
मुझको जब मिलवाया होगा
नामुमकिन है पाना
उस विस्मृत पल का सार
जरुरत है, भेजो थोडा प्यार…
बड़ी विडम्बना जो छोड़ गए
नन्हे फूल को डाल से तोड़ गए
दे गए पीड़ा बहुत अपार
छोड़ गए बीच मंझधार
मुड कर तो देखो जरा एक बार
जरुरत है, भेजो थोडा प्यार…
आपमें नाम की सार्थकता थी
हम रहते थे सब कुशल-क्षेम
माता जी, मैं और आप
मिल कर रहते थे बड़े "प्रेम"
परिवार से जबसे "प्रेम" गया
तबसे लगता जीवन ये भार
जरुरत है, भेजो थोडा प्यार…
पूज्य पिता जी लो श्राद्ध और तर्पण
मेरा जीवन आप को अर्पण
मेरे रक्त के कतरे, कण-कण
आपके पदचिह्नों को समर्पण
आपका जीवन मेरा दर्पण
आप थे दाता और मैं कृपण
है "प्रेम" की निधि मुझमें अपार
आपको समर्पित सारा प्यार
हाँ, आपको समर्पित मेरा प्यार
हे मेरे जीवन के आधार
और प्राणों के पारावार
जरुरत है, भेजो थोडा प्यार
अपने "अनिल" पर करो उपकार
जरुरत है, भेजो थोडा प्यार…
अनिल आर्य पुत्र श्री प्रेम सिंह
द्वारा आज २९ सितम्बर २०१३ को अपने पिता के श्राद्ध पर सप्रेम समर्पित




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