मेरा ये ब्लॉग मेरे मन के कोमल उद्गारों से विरचित है , आप सब इस पर सादर आमंत्रित हैं , अगर कोई सलाह देना चाहें तो कृतार्थ करें , आपका साथी अनिल आर्य...
Thursday, 26 September 2013
पहचान
जानता हूँ की जानने के लिए
जानना ज़रूरी है
पर जान बुझ कर
मैं तुमको जानता नही हूँ
पहचान कर भी पहचानता नही हूँ...
यूँ तो
तुमसे भी ज़्यादा रंगों वाले
देखे हैं मैने
पर
सब इंसान थे
खून लाल था सबका...
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