मेरा ये ब्लॉग मेरे मन के कोमल उद्गारों से विरचित है , आप सब इस पर सादर आमंत्रित हैं , अगर कोई सलाह देना चाहें तो कृतार्थ करें , आपका साथी अनिल आर्य...
Tuesday, 3 September 2013
dil se khelna
आज की बात सुनो
राज की बात सुनो
बचपन मैं कहा थे एक रोज ये
एक बाप ने बेटे से की
खेल कोई खेलो अगर दिल से खेला करो
बड़ा होकर बड़ा खेल उसने खेला है फिर
और दिल से ही खेल था वो
पर बात मैं फर्क था
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