Wednesday, 7 May 2014

आर्यव्रत कि नारी....

आप सभी विनीत मित्रों कि विशिष्ट मंडली को 
ईश्वर की सर्वोत्कृष्ट रचना अर्थात  ' नारी '
के बारे में, मैं अपने कुछ विचार सादर समर्पित 
करता हूँ… 
जानता हूँ अभिव्यक्ति थोडी कठिन है, किन्तु 
भाव ग्रहण एवं आत्मसात करके कृतार्थ करें… 

  आर्यव्रत कि नारी


अंतर-तारक धूल विनिर्मित
स्वाभाविक आकर्षण सुसज्जित
मृदुल-मेखला आवरण केश
स्नेह-सिंचित व्यवहार विशेष
विश्वनीयता ज्यों ज्वलंत ज्वाला
नयनो में विश्रांत मधुशाला
सहृदयता समग्रता शाश्वत साभार
अनुपम अदभुत ईश्वरीय उपहार
मंत्रमुग्ध पांडित्य पराजित
स्निग्ध सौम्य शालीन परिमार्जित
सह-आस्तित्व का यथार्थ संवेग
निस्सृत ज्वाल दमित-उद्वेग
प्रजनन-पोषण वर्धन दायित्व
पाषाण-खण्ड सम अखंड स्थायित्व
अन्तर्मन-आलोकित उजियारा
भस्मीभूत करती अँधियारा
मौत से पा चुकी ये पार
पतिव्रता की शक्ति अपार
उज्ज्वल प्रदीप्त छवि अति प्यारी
यही तो है आर्यव्रत कि नारी....


             











           अनिल आर्य… 

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