Wednesday, 22 October 2025

नन्हे 'शिवा' के नाम

🌸 नन्हे शिवा के नाम 🌸

आया है घर में नया जीवन,
इतना कोमल कि हवा भी ठहर जाए।
नन्हा शिवा —
तेरी साँसों में जैसे किसी प्रार्थना की सुगंध घुली है।

माँ-जी की आँखों में
अब हर सुबह तेरी मुस्कान उतर आती है,
उनके हाथों की लोरी में
सदियों की ममता गूँजती है।

दादा तुझे देखते हैं
तो उनके चेहरे पर समय रुक जाता है।
वे कहते हैं —
“यह तो मेरे आँगन का पुनर्जन्म है।”

बुआ तेरा माथा सहलाती हैं,
जैसे अपने बचपन को फिर से पा लिया हो।
चाचा तेरे रोने में हँसी ढूँढ लेते हैं,
कहते हैं — “यह तो घर की सबसे प्यारी आवाज़ है।”

परी और पावनी —
तेरे संग दो रंगों-सी खिलती हैं।
परी बड़ी है, समझदार, शांत।
दूर से देखती है तुझे अपलक,
जैसे किसी चमत्कार को।
उसकी आँखों में अचरज भी है, स्नेह भी।

पावनी छोटी है, चंचल,
हर पल चाहती है रहना तेरे पास।
गोद में लेना, दुलारना, सुलाना —
तेरे हाथ को थामे रखना ही उसकी दुनिया है।
उसकी हँसी और तेरी किलकारी
एक ही सुर में घुल जाती हैं।

माता रजनी —
अपने नाम को करती सार्थक।
रातों को जागती, निहारती, दुलारती,
तेरे हर स्पर्श को महसूस करती,
अपनी ममता के अमृत से सिंचती है।

पिता अनिल —
तेरे संग बन जाते और भी चंचल।
समय उनके लिए ठहरता नहीं,
वे हर पल तुझे निहारते हैं,
थकते नहीं, बस मुस्कुराते हैं।
उनकी आँखों में इच्छा है —
कि करो नाम रोशन परिवार का,
कि तुझमें गहराए आर्यत्व का गुण,
बनो तुम भी श्रेष्ठ, निर्मल और उज्ज्वल।
 

तू सोता है
तो पूरा घर धीरे बोलता है,
तू जागता है
तो दीवारें भी मुस्कुराने लगती हैं।

शिवा —
तेरा नाम ही शांति है,
तेरा आना ही आशीष,
और तेरे साथ
यह घर हो गया है और भी पूर्ण,
एक-दम परिपूर्ण। 

अनिल आर्य...

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