🌸 भाई दूज का स्नेह गीत 🌸
आज सजे हैं फूल द्वारे, दीप जले हर ओर,
बहना के मन में उमड़ रहा, स्नेह अपार पुरजोर।
थाली में आरती सजी है, रोली - चावल साथ,
नेत्रों में आशीष झिलमिल, अधरों पर सौगात॥
छुटकी की छिटपुट शरारतें, चंचल नयन स्नेह,
बोल में मिठास भरी है, जैसे फागुन मेह।
भाई निहारे स्नेह - दृष्टि, मन हो जाए निहाल,
जैसे पिता का हृदय उमडता, पा कर स्नेह अपार॥
भागी फिरती - पायल बजती, सुख का आता भाव,
उसके पावन पैरों छनके, हर घर आँगन - गाँव।
थाली सजे आराधन से, दीपक झलके साथ,
छोटी बहन के निर्मल मन में, बसता स्नेह-प्रभात॥
भाई आया हँसता-खिलता, मन में भाव अनूप,
बचपन जैसे लौट पड़ा हो, गलियों में लेते सर्दी-धूप।
माँ की गोदी, हँसी पुरानी, यादों का संसार,
बड़ी बहन के आँचल में छिपकर, पा ले माँ-सा प्यार॥
बडकी बोले – “सुखी रहो तुम, पथ में हो उजियार,”
भाई कहे – “तेरे आशीष से, जीवन हो साकार।”
क्षणभर को थम जाए समय, बोले मन बिन-बोल,
इस बंधन में लिपटा रहता, प्रेम अमर अनमोल॥
कहे अनिल आर्य प्रेम यही है, स्नेह यही उपहार,
भाई दूज का यह उत्सव है, जीवन का त्योहार।
जहाँ न द्वेष, न दूरी कोई, बस ममता की रीत,
बहन-भाई के इस स्नेह का, गूँजे मधुर संगीत॥
अनिल आर्य...
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