रजनी - मेरे जीवन का आधार
रजनी,
तुम्हारा नाम
मेरे जीवन में
किसी शोर की तरह नहीं आया,
तुम आईं
जैसे सुबह—
बिना पूछे,
पर सब कुछ बदलती हुई।
जब मेरी तैयारी
नियति की मेज़ पर
ठुकरा दी गई,
और ईमानदारी
सूची में सबसे नीचे रखी गई—
तब तुमने
मुझसे कोई सवाल नहीं किया,
बस मेरा हाथ
थामे रखा।
मैं घर के पास रहना चाहता था,
तुमने मुझे
घर बना कर दे दिया।
अनायरा
तुम्हारे भीतर पल रही थी,
और तुम
अपने भीतर भविष्य गढ़ रही थीं—
किताबों के पन्नों पर,
और धैर्य की सीमाओं पर,
गढ़े नए आयाम तुमने।
रातें जब
मेरी चुप्पी से भर गईं,
तुमने शब्द नहीं माँगे,
बस पास बैठकर
मेरी साँसों को
सामान्य होने दिया।
जब रातें लंबी हुईं,
और रास्ते छोटे पड़ गए,
तुमने दीप बनकर
मेरे भीतर उजाला रखा।
आज
पावनी की सरलता में,
रणविजय की दृढ़ आँखों में,
मैं तुम्हारा मौन त्याग
पहचान लेता हूँ।
रजनी,
प्रेम अगर केवल
मुस्कान और स्पर्श होता,
तो वह इतना गहरा नहीं होता,
न ही होते उसके इतने मायने।
प्रेम वह है—
जो कठिन समय में
एक-दूसरे को
कमज़ोर होने की
अनुमति देता है,
सिर्फ आंखों से
थाम लेता है हाथ,
बनता है पतवार,
खेता है नाव,
सहता है धूप,
बनता है छाँव।
जनवरी 2017
हमारी कहानी की
सिर्फ़ एक माह नहीं,
वह अध्याय है
जब दो अधूरे मन
एक-दूसरे के
उत्तर बन गए।
अगर जीवन
फिर से चुनने को मिले—
तो मैं वही कठिन रास्ता चुनूँगा,
बस शर्त यही होगी
कि उस राह पर
तुम चल रही हो।
पंद्रह जनवरी
मेरे लिए तारीख़ नहीं,
एक प्रतिज्ञा है—
कि हर जन्म में
चुनूँगा तुम्हें ही बस,
भले समय विपरीत हो
भले भाग्य रूठा हो,
भले वो साथ छोटा हो,
पर हो बस तुम्हारे साथ।
तुम मेरी पत्नी नहीं रजनी,
तुम वह प्रार्थना हो
जो मैंने कभी
ज़ोर से नहीं माँगी-
पर जीवन ने
सुन ली।
तुम मेरी संगिनी नहीं रजनी,
तुम मेरी स्थिरता हो,
और अगर जीवन युद्ध है-
तो मेरी सबसे मजबूत ढाल भी तुम हो।
शादी की वर्षगांठ की हार्दिक शुभकामनाएँ।
मेरे जीवन की
सबसे शांत
और सबसे मजबूत स्त्री,
तुम्हारा साथ
मेरे जीवन का
सबसे सुंदर निर्णय है।
तुम्हारा अनिल आर्य...
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