अब समय है—खुद को सिद्ध करने का
नववर्ष कोई तिथि नहीं है,
यह आत्मा का आह्वान है—
उठो, सँभलो,
अब स्वयं को पहचानने का समय है।
बारहवीं केवल एक कक्षा नहीं,
यह जीवन का पहला मोड़ है—
जहाँ बहाने छूटते हैं,
और जिम्मेदारियाँ नाम लेकर बुलाती हैं।
कल की भूलें बोझ न बनें,
उन्हें सीख बनाकर आगे रखो—
गलती से मत डरना,
पर उसे दोहराने की हिम्मत मत करना।
लेखन में शुद्धता लाओ,
विचारों में अनुशासन भरो—
कलम तुम्हारा चरित्र लिखती है,
और उत्तर-पुस्तिका तुम्हारा भविष्य।
आज की गई मेहनत ही
कल का आत्मविश्वास बनेगी—
याद रखना,
भाग्य भी उन्हीं का साथ देता है
जो स्वयं का साथ नहीं छोड़ते।
सिर्फ़ उत्तीर्ण नहीं होना है तुम्हें,
उदाहरण बनना है—
घर के लिए गर्व,
समाज के लिए दर्पण,
और देश के लिए आशा।
मैं अंक नहीं माँगता तुमसे,
मैं तुम्हारा सर्वश्रेष्ठ चाहता हूँ—
ईमानदार प्रयास,
और कभी न झुकने वाला आत्मबल।
चलो, इस नववर्ष संकल्प लें—
पढ़ेंगे, लड़ेंगे, जीतेंगे,
क्योंकि
देश का भविष्य
आज कक्षा में बैठा है।
— अनिल आर्य
(आपका हिन्दी प्राचार्य एवं कक्षा अध्यापक)
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