कुछ चीजें
बस देखने तक ही सही हैं
जी चाहे छूने को
पर छूने की नहीं हैं…
इन का काटा
नहीं मांगता पानी
हालत हो जाती है खस्ता
याद आ जाती है नानी …
ये खूबसूरत मौत के फरिस्ते हैं
जिनको पाने को हम तरसते हैं
मौत होती है तब जिन्दगी से प्यारी
यानि राहू-केतु होते हैं भारी ,
बात मानो रहो इनसे दूर
वरना मरोगे बेक़सूर …
अनिल आर्य ….
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