Thursday, 17 October 2013

gumsum aankhen

गुमसुम सी हैं आँखें मेरी
की पानी बह नहीं पाता
अक्सर ख़ामोशी की दबिश में
चुप रह जाता हूँ
मैं कुछ कह नहीं पाता
बहुत गहराई तक हलचल मचा देता है 
वो अश्क जो आँख से बह नहीं पाता
सोचता हूँ की काश तू न जानता
की ये शख्स तेरे बिन रह नहीं पाता
                           अनिल आर्य  …


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