किसी एक चाँद से नहीं
सभी सितारों से कह दो
फिजा के रंगों में बिखरे
नज़ारों से कह दो
अरे डरता नहीं हूँ
सितमगारों से कह दो
हूँ मैं बेख़ौफ़ परिंदा
उन पिंजरों के ख़रीदारों
से कह दो
बदल लें
हाँ बदल लें
अपनी आदत
हुस्न वालों से कह दो
मैं चाहूँ रूहानी इश्क़
जिस्म वालों से कह दो
मैं कद्रदान रूह का
क़द्रदानों से कह दो
हूँ परवाना
जला पाओगे न तुम
अपनी लौ को आजमाले
इस आग़ से कह दो
कुछ तो तुम भी
लोक-लाज से कह दो
मेरे खुदा ख़ूब
बदनाम हो जाओगे
जो चुप्पी पे देदी जाँ मैने
चलो छोड़ो पीछे कि बातें
कुछ आज से कह दो
अनिल आर्य .......
सभी सितारों से कह दो
फिजा के रंगों में बिखरे
नज़ारों से कह दो
अरे डरता नहीं हूँ
सितमगारों से कह दो
हूँ मैं बेख़ौफ़ परिंदा
उन पिंजरों के ख़रीदारों
से कह दो
बदल लें
हाँ बदल लें
अपनी आदत
हुस्न वालों से कह दो
मैं चाहूँ रूहानी इश्क़
जिस्म वालों से कह दो
मैं कद्रदान रूह का
क़द्रदानों से कह दो
हूँ परवाना
जला पाओगे न तुम
अपनी लौ को आजमाले
इस आग़ से कह दो
कुछ तो तुम भी
लोक-लाज से कह दो
मेरे खुदा ख़ूब
बदनाम हो जाओगे
जो चुप्पी पे देदी जाँ मैने
चलो छोड़ो पीछे कि बातें
कुछ आज से कह दो
अनिल आर्य .......


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