मेरा ये ब्लॉग मेरे मन के कोमल उद्गारों से विरचित है , आप सब इस पर सादर आमंत्रित हैं , अगर कोई सलाह देना चाहें तो कृतार्थ करें , आपका साथी अनिल आर्य...
मेरे एहसास... मरते गये... और वो... दर्द बढ़ाता गया... इन्तेहाँ की हद... कहर ढाने को.. वो पत्थर से... इन्सान हुआ... और... सह-सहकर... मैं... इन्सान से... पत्थर... इंसानियत... के... पथ पर... एक नया... मील का पत्थर...
अनिल आर्य...
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