Monday, 30 June 2014

क़दम वापस हटा लूँ...

हवाओं को कह दो
खुदको आजमा लो,
फिजाअों को कह दो
कहर बरपा लो,
क़दम वापस हटा लूँ
ये मुमकिन न होगा,
चाहे मेरे रास्तों पे
काँटे बिछा लो...
शोलों की लौ कि
औकात क्या ? ? ?
गर
दिल मेँ दहकते
अंगारे बसा लो...

अनिल आर्य...

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