मेरा ये ब्लॉग मेरे मन के कोमल उद्गारों से विरचित है , आप सब इस पर सादर आमंत्रित हैं , अगर कोई सलाह देना चाहें तो कृतार्थ करें , आपका साथी अनिल आर्य...
हवाओं को कह दो खुदको आजमा लो, फिजाअों को कह दो कहर बरपा लो, क़दम वापस हटा लूँ ये मुमकिन न होगा, चाहे मेरे रास्तों पे काँटे बिछा लो... शोलों की लौ कि औकात क्या ? ? ? गर दिल मेँ दहकते अंगारे बसा लो...
अनिल आर्य...
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