मेरा ये ब्लॉग मेरे मन के कोमल उद्गारों से विरचित है , आप सब इस पर सादर आमंत्रित हैं , अगर कोई सलाह देना चाहें तो कृतार्थ करें , आपका साथी अनिल आर्य...
उन्मुक्त मन से उड़ानें भर लो, अपने " मैं" में बस तुम ही न रहो सारे जहाँ को शामिल कर लो, बदल रहा ज़माना बदलो खुद से भी अब प्यार तुम कर लो...
अनिल आर्य...
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