Saturday, 14 June 2014

रंग

रंगीन तो हैं
कपड़े
रंगों की पर
कमी है
ज़िंदगी को जो
रंग डाले
होली कभी न आई
होली की बात
छोड़ो
मन से न मनी
दिवाली
हाँ दिवाला खुल के
निकला
खुल के दिल हँसा है
हँस के तो
खुशी पायी
खुद पे हँसना
कौन गुनाह है ?

अनिल आर्य...

No comments:

Post a Comment