रंगीन तो हैं
कपड़े
रंगों की पर
कमी है
ज़िंदगी को जो
रंग डाले
होली कभी न आई
होली की बात
छोड़ो
मन से न मनी
दिवाली
हाँ दिवाला खुल के
निकला
खुल के दिल हँसा है
हँस के तो
खुशी पायी
खुद पे हँसना
कौन गुनाह है ?
अनिल आर्य...
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