मेरा ये ब्लॉग मेरे मन के कोमल उद्गारों से विरचित है , आप सब इस पर सादर आमंत्रित हैं , अगर कोई सलाह देना चाहें तो कृतार्थ करें , आपका साथी अनिल आर्य...
अर्थ के व्यर्थ मोह मेँ फँस कर जो रोपोगे सो पाओगे, पैसा होगा बहुत मगर जीने को स्वच्छ पर्यावरण कहाँ से लाओगे...
अनिल आर्य...
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