Monday, 17 November 2025

उजला सवेरा

🌸 “इस एक दिन का उजाला” 🌸


आज का दिन दो दिशाओं में फूल खिला रहा है—
एक तरफ नन्हे शिवा के लिए जल का आशीष
जो पीढ़ियों की पवित्रता लेकर
उसके माथे पर उतरना चाहता है।

दूसरी तरफ रितू—
जो वर्षों से सँजोया गया निश्चय
अब योगी के हाथों में
अपना सुरक्षित ठिकाना पा रहा है।

कूँआ पूजन की घंटियाँ
और रिंग सेरेमनी की धीमी मुस्कान—
दोनों अलग हैं, पर दोनों
घर में एक ही समय उल्लास भर रही हैं।

शिवा के माथे पर पानी की पहली बूँद
और रितू की उँगली में चमकती अंगूठी—
दोनों संकेत हैं कि भविष्य
अपने सबसे कोमल रूप में
आज इस परिवार पर झुककर आशीष दे रहा है।

ईश्वर करे
शिवा की राहें सरल हों,
उसकी हँसी स्थायी हो,
और उसका आत्मबल,
हर रण में विजय पाए,
शिवा अपने भीतर
निर्भयता, कोमलता और प्रकाश—
तीनों को संतुलित करके बड़ा हो,

और रितू-योगी—
दोनों अपनी-अपनी कमज़ोरियों और सपनों को
खुले मन से एक-दूसरे में सौंपकर
जीवन की नई शुरुआत को
गंभीरता और प्रेम से सँवारें।

अपनी साझा यात्रा में
वह धैर्य, वह भरोसा,
और वह विनम्र प्रेम खोजें
जो किसी भी घर को
वास्तव में घर बनाता है।

आज 23 नवम्बर—
एक तारीख नहीं,
परिवार की स्मृतियों में,
सदैव वह दिन बन कर रहे,
जिसमें शांति, सुःख, समृद्धि,
और भविष्य का देखा हर सपना,
फल फूल कर परिपूर्ण हुआ हो,
जिसका रौपा हुआ पौधा, 
आने वाली पीढ़ीयों को धूप से बचाए।

अनिल आर्य...



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