आनंद-
तेरा स्वभाव ही तेरी पहचान है।
तेरा स्नेह सरल,
तेरी नीयत निर्मल,
और तेरी संगत
हर परिस्थिति में अटूट रही है।
तू वह मित्र है
जिसका साथ विश्वास बनकर चलता है,
जिसकी मुस्कान में अपनापन,
और जिसके शब्दों में
सीधी–सच्ची गर्माहट रहती है।
तेरा मन पारदर्शी है—
इसलिए हर रिश्ता
तेरे पास आकर सुरक्षित महसूस करता है।
अब जब नीलम जीवन में आएगी,
तेरा यही स्नेह
घर का आधार बनेगा,
और तेरी यही स्थिरता
उसे जीवन की सहज डोर थमा देगी।
नीलम—
मणि-सी शांत,
सुगंध-सी सौम्य।
उसकी उपस्थिति
घर को रौशनी से भर देगी।
उसकी विनम्रता
रिश्तों को कोमल बनाती देगी,
और उसकी मधुर दृष्टि
भविष्य को नया आधार देगी।
आनंद की सादगी
और नीलम की शांति—
ये दोनों मिलकर
एक संतुलित, सौभाग्यमय जीवन-पथ रचेंगे।
अनिल के हृदय में
आनंद के लिए सदा एक जगह रही है—
जहाँ भरोसा भी है,
और गर्व भी।
अनिल जानता है—
आनंद जैसा भाई
किस्मत का दिया हुआ दीप है;
सुख में संग,
और दुःख में छाया-सा साथ निभाने वाला है
अब क्या ही कहुँ
की आनंद को नीलम मिली,
या नीलम को हीरा मिला,
बस यह साथ मोतियों की माला से सुन्दर है।
आज भी अनिल की हर दुआ
आनंद के सिर की बला टालती है,
हौसला बुलंद करती सलाह मेरी,
हर मुश्किल का हक़ निकालती है।
मित्र नव अध्याय यह,
इसमें इतना, धीरे बोलो—
कि प्रेम अपने आप गूंज उठे।
मन से सुनो—
कि समझ की हर गाँठ
स्वतः खुल जाए।
सम्मान को
हर बातचीत का प्रथम पायदान बनाओ,
और धैर्य को
उसका स्थायी दीप—
इन्हीं से घर का राग
सुमधुर रहता है।
विचार भिन्न हों
तो आवाज़ नहीं,
नज़र ऊँची करो—
यही क्षण प्रेम को गहराई देता है।
और इस यात्रा को
एक ही लय में चलाना—
क्योंकि लय ही वह नाव है
जो दो दिलों को
एक धारा पर आगे बढ़ाती है।
ईश्वर करे,
तुम दोनों के जीवन में
केवल सहजता और सुख बसे।
दोनों के हर कदम पर
प्रभु कृपा साथ रहे।
सुख का वृक्ष फैले,
शांति की धारा बहे,
और विश्वास का दीप
सदा तुम्हारा मार्ग आलोकित करे।
एक नवदीप जले,
जो अपनी रौशनी से घर भर दे,
भविष्य सुरक्षित कर दे,
और जीवन को नव-स्वर दे
जिससे तुम दोनों
शांत, स्थिर और सुंदर दिशा में बढ़ते जाओ।
✨ अनिल की ओर से —
आनंद और नीलम को अनंत शुभकामनाएँ।
सप्रेम : अनिल आर्य...
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