कुआँ-पूजन-दिन अंबर भर, मंगल-स्वर मिला चलें।
निर्मल-सलिल-सा जीवन उसका नित उज्ज्वल रहे,
सत्त्व-दीप्ति से पूर्ण हृदय में परम-श्रेय फलें।
ललित चरण जब स्पर्श करें इस पावन जल-धारा को,
वृद्धि-विजय-समृद्धि नित हो, हो कृपा अपार।
शौर्य, प्रज्ञा, साहस-गौरव—सब गुण जाग्रत हों,
देव-विप्र का आशीष रहे, सदा नूतन-काज संवार।
और उसी दिवस शुभ-क्षण में रीतू–योगी भी संग,
भाग्य-लेख ने रच दी जैसे सौम्य-विवाह-अंग।
व्रत-संयम, स्नेह, विश्वासों का शुभ उन्मेष खिले,
मंगल-मालिका में दोनों के जीवन-पुष्प मिले।
रीतू की मधुर सरलता ही गृह-दीपिका बनी,
योगी की दृढ़ निष्ठा से हो हर राह सुहावनी।
द्विज-स्वर वन्दन, देव-सम्मति—सब उनके साथ रहें,
दंपति-भावी-पंथ सदा सौभाग्य-ज्योति में बहें।
आज २३ नवम्बर के ये दोनों पावन प्रसंग,
मानो शुभ-ऋतु के आँगन में खिलते नील-तरंग।
एक ओर शिवा का पूजन, एक ओर वर-वधु का संग—
दोनों पर वरदहस्त रहे, हो कल्याण, हर रण-विजय-उमंग।
शिवा व रीतू–योगी पर, मंगल-वृष्टि बरसाए,
सौभाग्य-दीप प्रज्वलित हों, हर पथ लक्ष्मी जी आएँ।
सत्त्व-शांति, प्रज्ञा-प्रभा, जीवन-द्वार सजाएँ—
युग-युग तक उनके दिन शुभ हों, देव-कृपा दें, मुस्काएँ।
अनिल आर्य...
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