Monday, 17 November 2025

मंगल गीत

मंगल-प्रभात गीत” 🌼

शिवा का कूँआ-पूजन तथा रितू–योगी का रिंग-संस्कार

१.
आज दिवाकर दीप्त खड़ा है,
शुभ-क्षण का अभिनंदन करे।
गृह-आँगन में सौभाग्य-सुहागा,
मंगल-ध्वनि सर्वत्र फिरे।

२.
शिवा बालक के कूँआ-पूजन में
जल की ज्योति पवित्र बहे;
तेज, धैर्य, करुणा का संचय—
उसके जीवन-पथ पर रहे।

३.
कोमल चरणों में देव-कृपा हो,
वाक् में सत्य, हृदय में शील;
कर्म बने उसका सर्वोपाय—
धन्य बने वह, धैर्य-अनिल।

४.
रितू–योगी का आज संस्कार,
बंधन नव-उज्ज्वल हो जाए;
विश्वास-सरिता मधुर सुरों में
मन-हंस दोनों को बहाए।

५.
नेत्रों में दीप्ति, वाणी में माधुर्य,
संबंध रहे दृढ़, स्नेहमय;
शुचि संकल्प सदा अविचल हों—
जैसे दीपक नित स्थिरमय।

६.
गृह-परिसर में शांति वसन्ती,
आशीषों की धारा बहे;
धर्म, मर्यादा, प्रीति, समन्वय—
युगल-पथ को शोभित करे।

७.
तेईस नवम्बर—सौभाग्य-क्षण यह,
स्मृति में सदा उजास भरे;
शिवा, रितू, योगी—तीनों पर
मंगलम् देवत्व नित झरे।

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