Sunday, 25 January 2026

26 जनवरी प्रथम त्यौहार

26 जनवरी - स्वराज का सिंहनाद

26 जनवरी कोई तारीख़ नहीं,
जन-स्वराज का सिंहनाद है।
मुकुट नहीं, सिंहासन नहीं,
भारत का स्वर-संविधान का नाद है।

स्याही नहीं थी, शपथ थी वह,
जिससे राष्ट्र का रूप गढ़ा।
अक्षरों में भविष्य धड़का,
भारत गणतंत्र बनकर हुआ खड़ा।

राजा नहीं, विधान यहाँ,
जन-इच्छा सर्वोच्च स्वर है।
न्याय, समता, बंधुत्व-
हर नागरिक का अधिकार प्रखर है।

सीमा पर अडिग प्रहरी बोले-
“संविधान मेरी तलवार है।”
हल थामे किसान कहे-
“यही मेरी धरती का आधार है।”

नारी मस्तक ऊँचा उठाए,
सम्मान यहाँ संस्कार बने।
शिक्षा जब शस्त्र बने हाथों में,
तब भारत नव-निर्माण रचे।

तिरंगा केवल ध्वज नहीं,
यह त्याग, तपस्या की गाथा है।
हर रंग में इतिहास जगा,
हर रेशा राष्ट्र की भाषा है।

26 जनवरी चेताए हमको-
स्वतंत्रता उपहार नहीं।
संविधान की रक्षा करना,
हर नागरिक रखे व्यवहार सही।

आओ, फिर प्रतिज्ञा दोहराएँ-
कर्तव्य को सिंहासन दें।
भारत तभी विश्व-नायक हो,
जब कर्म को ही शासन दें।

26 जनवरी-
एक दिवस नहीं, उद्घोष है।
लोकतंत्र की धड़कन,
भारत का आत्म-घोष है। 

अनिल आर्य...

No comments:

Post a Comment