Gen-Z का प्यार
दिल में नहीं रहता,
फोन की मेमोरी में रहता है—
स्टोरेज फुल हुई
तो रिश्ता डिलीट।
इन्हें इश्क़ चाहिए
No effort,
वफ़ा भी चाहिए इतनी
की Password मिल जाए बस,
और ब्रेकअप चाहिए ऐसे
“कि तू बहुत अच्छा है,
बस मेरे टाइप का नहीं।”
ये लोग कहते हैं—
“हम deep हैं,”
और दो लाइन पढ़ते ही
बोर हो जाते हैं।
इनका दर्द भी
रील में होता है,
और हीलिंग
DP बदलने से।
लड़का बोले—
“मैं टॉक्सिक नहीं हूँ,”
पर हर तीस मिनट में
Online status चेक करता है।
लड़की बोले—
“मुझे space चाहिए,”
और space में
चार लोग already घूम रहे होते हैं।
Gen-Z का प्यार
इतना fragile है
कि एक
“OK”
पूरे रिश्ते को
ICU में डाल देता है।
इन्हें वफ़ा से डर लगता है,
क्योंकि वफ़ा में
सब्र चाहिए—
और सब्र
इनके syllabus में नहीं।
ये कहते हैं—
“Commitment overrated है,”
क्योंकि commitment में
भागने का ऑप्शन नहीं होता।
इनका forever
बस इतना होता है—
“जब तक कोई बेहतर न मिल जाए।”
और फिर ये पूछते हैं—
“आजकल प्यार टिकता क्यों नहीं?”
क्योंकि जिसने
इंतज़ार करना नहीं सीखा,
वो रिश्ता निभाने की
हिम्मत कहाँ से लाए?
इसलिए व्यंग्य की कटार
अब सीधा वार करती है—
रील में पला प्यार
असल ज़िंदगी में
पहली ज़िम्मेदारी पर
दम तोड़ देता है।
अनिल आर्य...
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