(शुभ विवाह | 4 फ़रवरी)
कुछ क्षण
कहे नहीं जाते,
वे मन में उतरकर
आशीर्वाद बनते हैं।
आज
मेरे लिए
भी ऐसा ही क्षण है
अमित,
तुम्हें समय के साथ
जिम्मेदारी में
स्थिर होते देखा है—
शांत,
पर दृढ़।
रीतू,
यह घर
तुम्हारे स्वभाव से
और समृद्ध हो—
तुम्हारी समझ से
संवाद गहरे हों,
तुम्हारी शांति से
दिन सहज बनें,
और तुम्हारी उपस्थिति में
हर रिश्ता
अपनी जगह पाए।
यह विवाह
केवल रस्म नहीं,
जीवन को
साथ सँभालने का
सचेत संकल्प है।
अमित की दृढ़ता
और रीतू की सौम्यता
जब एक होंगी,
तो जीवन स्वयं
संतुलन पाएगा-
और हर किसी के
जीवन से विष निकाल,
अमृत ही बसाएगा।
एक बड़े भाई का
आशीर्वाद है-
तुम्हारा साथ,
तुम्हारा रिश्ता
सिर्फ शब्दों से नहीं,
निभाने से पहचाना जाएगा।
आने वाला समय
सब कुछ बदलेगा,
पर विश्वास कभी न बदले;
जीवन
कठिन हो भी कभी,
पर एक-दूसरे का हाथ
कभी न छूटे।
ईश्वर करे—
तुम्हारा दांपत्य
शोर से दूर,
सार्थकता में गहरा
और संतोष में
सदैव स्थिर रहे।
अमित और रीतू,
सुखी रहो—
आज भी,
और हर आने वाले कल में।
अनिल आर्य...
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