स्नेहमयी-अनुशासित
आज कक्षाएँ वही हैं,
घंटियाँ वही बजती हैं,
पर विद्यालय परिसर में,
एक परिचित सन्नाटा है।
बरसों की वह सहयात्रा,
जहाँ आप विज्ञान पढ़ाती रहीं,
और हम देखते रहे—
कैसे अनुशासन
स्नेह के साथ चल सकता है।
कभी प्रयोगशाला की तैयारी,
कभी परीक्षा की उलझन,
हर मोड़ पर
आपकी स्थिरता
हम सबके लिए भरोसा बनी।
आपके साथ काम करते हुए
यह समझ आया—
अध्यापक होना
सिर्फ पेशा नहीं,
एक सतत साधना है।
आज सेवानिवृति है,
पर यह विदाई नहीं लगती,
क्योंकि जिन मूल्यों को
आपने जिया,
वे इस विद्यालय की
दीवारों में बस चुके हैं।
सहकर्मी के रूप में
आपका साथ
सम्मान की पाठशाला रहा,
और एक वरिष्ठ साथी के रूप में
आपका होना
सौभाग्य।
नीलू शर्मा जी,
यह प्रणाम
केवल एक अध्यापक का नहीं,
एक अनुज का भी है—
जो आपकी शांत,
गरिमामयी उपस्थिति
हमेशा महसूस करता रहेगा।
आज आपकी कुर्सी भले खाली हो,
पर मार्गदर्शन अब भी साथ चलता रहेगा।
विद्यालय आपको विदा नहीं करता,
आपको अपने संस्कारों में सँजो लेता है।
अनिल आर्य...
🙏🏻 सादर नमन 🙏🏻
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