पावनी — जीने की नया फलसफ़ा
नन्ही-सी पावनी, पर मन का आकाश अपार,
हँसी में उसकी झिलमिल करता जीवन का सार।
स्वभाव में ऐसी कोमल स्नेहिल मधुरता बसी,
जिससे मिलते ही हर दुःख स्वतः बन जाए खुशी।
दिल से दिल जोड़ लेना उसकी सहज प्रवृत्ति है,
मिलनसार मुस्कान ही उसकी मधुर सम्पत्ति है।
जहाँ खड़ी हो, वहाँ प्रसन्नता का बसंत उतर आए,
जैसे सूने आँगन में चुपके से कुसुम खिल जाएँ।
मन की धुन पर चलना उसकी सुमधुर नीति है,
बंधन से परे अपनी लय में जीना उसकी प्रीति है।
जो रुचिकर लगे उसे साहस से वह अपनाती है,
छोटी-सी आयु में भी जीवन-पथ समझाती है।
अपनी शर्तों पर जीना कोई इससे सीखे,
निर्मल मन में जैसे स्वच्छ गगन ही दीखे।
सच में पावन जीवन का पावन रस्ता बतलाती है,
जीवन की मधुरतम रीति सरलता से सिखालाती है।
हँसो खुलकर, दिल से जुड़ो, मन की सुनो सदा,
अगर खुलकर जीना जो चाहो बांधो ये फलसफ़ा।
करो वही जो सहज बुद्धि कहती है, कोई हो फिर ख़फ़ा,
जियो ऐसे जैसे पावनी जीती है हर जगह हर दफा।
जन्मदिन पर आशीर्वचन
पावनी, तुम्हारी हँसी सदा मधुमय गान बने,
तुम्हारा चंचल मन सबके लिए वरदान बने।
जहाँ तुम्हारे चरण पड़ें, वहाँ भी स्नेह के सुमन खिलें,
और जो जीवन तुम्हारे संग रहें उन्हें भी सदा मुस्कान मिलें।
अनिल आर्य...
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