Friday, 25 April 2014

जाग मुसाफिर; अब रैन भुला


महासमर अनश्वर में 
 प्राणों की पीड़ा मत ढूँढो 
प्यार की अभिव्यक्ति में
      स्वप्न कि क्रीड़ा मत ढूँढो… 

 ढूँढने से कुछ नहीं मिलेगा 
खो जाओगे तो पाएगा
तैरोगे तो डूबोगे 
      जो डूबोगे उतरायेगा… 



खो जाओ तुम प्रेम भँवर में 
खोना-पाना सब भूल-भुला 
 मत सोचो क्या हासिल मुझको
     सब खोया लेकिन कुछ नहीं मिला… 

खोना-पाना तो क़िस्मत है 
रोने से हासिल क्या होगा ?
जाग मुसाफिर; अब रैन भुला 
   सोने से हासिल क्या होगा ???

   अनिल आर्य…

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