Thursday, 17 April 2014

ये मूर्ख जमाना कहता है , मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ…

मैं खुद में खोया रहता हूँ
खुद की ही बातें करता हूँ
और ये मूर्ख जमाना कहता है
मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ…

किसी की मुझे परवाह नहीं
किसी का भी होने से, मैं डरता हूँ
और ये मूर्ख जमाना कहता है
मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ…

आहों की महफ़िल से बस मेरी यारी है
और मैं निपट-अकेले रमता हूँ
और ये मूर्ख जमाना कहता है
मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ…


वैसे मेरी खुद की कोई ख़ास औकात नहीं
मुझ पत्थर में तेरे जैसे शुद्ध-देसी ज़ज्बात नहीं
लेकिन फिर भी मैं खुद का हीरो,
खुद की बहुत इज्जत करता हूँ
और ये मूर्ख जमाना कहता है
मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ…



किसी के ज़ज्बातों की कोई चाहत नहीं
कौन कहता है मुझे खुद से मोहब्बत नहीं
मैं खुद पर मरता हूँ
जज्बाती होने से बस डरता हूँ
और ये मूर्ख जमाना कहता है
मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ…

                 अनिल आर्य....





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