Saturday, 26 April 2014

विश्वशक्ति का ध्वज तिरंगा

विजय-भेरी का मैं रण बांकुरा 
रण-भेरी से कभी डरा नहीं 
चारों और से मौत थी झपटी 
दुश्मन के हाथों मरा नहीं.... 

विजय-दम्भ में डूब कभी मैं 
आतप से उतराया ना 
दुश्मन भी जो झुका कभी तो 
उस पर खड़ग उठाया ना.... 

सौगन्ध मुझे इस मिट्टी कि 
इस मिट्टी में ही मिला दूँगा 
भारत का वीर सिपाही हूँ 
प्रलय तक को धूल चटा दूँगा.... 

जो मेरे भारत पर वार किया 
तो केसरिया कर जाऊँगा 
क्या मौत कि औक़ात है जो 
तुझे मारे बिन मर जाऊँगा.... 

विश्वशक्ति का ध्वज तिरंगा
नव-परिवर्तन कर जाएगा 
होगा शांति-संधान जगत में 
तिरंगा शान से लहराएगा.... 


अनिल आर्य....

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