मैं लाख सच बोलूँ,
मेरी एक न मानेगी....
और वो एक झूठ बोलेगा,
उसे सराबोर कर देगा…
ये जाट सोया शेर है ,
इसे ज्यादा न छेड़ो तुम,
ये जो जाग जायेगा
तो बस आर-पार कर देगा…
हार-जीत का
इसे मोल भाव नहीं आता ,
ये रोहतक का मौलड़ जाट
किसे की सौड़ सी भर देगा…
जब तक तू जानेगी
'अनिल' तीन-तेरह कर देगा…
और फिर मैं लाख सच बोलूंगा,
तू मेरी एक न मानेगी....
और वो एक झूठ बोलेगा,
तुझे सराबोर कर देगा…
अनिल आर्य…
मेरी एक न मानेगी....
और वो एक झूठ बोलेगा,
उसे सराबोर कर देगा…
ये जाट सोया शेर है ,
इसे ज्यादा न छेड़ो तुम,
ये जो जाग जायेगा
तो बस आर-पार कर देगा…
हार-जीत का
इसे मोल भाव नहीं आता ,
ये रोहतक का मौलड़ जाट
किसे की सौड़ सी भर देगा…
जब तक तू जानेगी
'अनिल' तीन-तेरह कर देगा…
और फिर मैं लाख सच बोलूंगा,
तू मेरी एक न मानेगी....
और वो एक झूठ बोलेगा,
तुझे सराबोर कर देगा…
अनिल आर्य…

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