Monday, 14 April 2014

शिद्दत से चाहा था , शिद्दत से भुला देंगे ...

शिद्दत से चाहा था
शिद्दत से भुला देंगे 
अपने दिल की किताब से 
इश्क़ का हर अल्फ़ाज़ मिटा देंगे.... 

इश्क़ करने की 'अनिल'
तुझे ऐसी सजा देंगे 
तेरी हस्ती-औ-नाम परस्ती को 
मिटटी मैं मिला देंगे.... 

ए - जिगर तू रोएगा 
तू मुझसे फरियाद करेगा,
तेरे इश्क़ ओ माशूक़ को हम भुला देंगे,
तेरी बेपनाह मुहब्बत की 
बेशुमार दौलत को,
हम इस बेदर्द ज़माने पर 
बड़ी बेदर्दी से लूटा देंगे....



करने चला था इश्क़, साला !
सर का भूत भगा देंगे ,
मिट जाएगी या तो हस्ती तेरी,
या तेरा इश्क़ मिटा देंगे… 

चिंता न करना जान मेरी 
तेरा नाम दिल से भुला देंगे,
जान है जब तलक जान मैं 
हम पूरी जान लगा देंगे.... 

जितनी शिद्दत से चाहा था 
उतनी शिद्दत से भुला देंगे,
अपने दिल की किताब से 'अनिल'
इश्क़ का हर अल्फ़ाज़ मिटा देंगे…


अनिल आर्य…

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