Wednesday, 16 April 2014

कुंदन

जीवन की ज्वाला मैं अकसर
         तपकर ही कुंदन होते हैं,
जो धू - धू  कर के जलते हैं 
        वो स्वयं प्रकाशित होते हैं.… 
सूरज खुद से चमकते हैं 
        चंदा प्रकाश को ढ़ोते हैं,
ग्रह परिक्रमा करते हैं
          तब खुद परिक्रमित होते हैं....


         

 अनिल आर्य.... 

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