Monday, 2 February 2026

माहरा कुणबा

मामा नाचै नागिन बनके, साथ में बाजें ढ़ोल
मामी नाचे स्टेज तोड़ दे, होरी सें कती गोल।

मामा का लड़का-दूल्हे का साथी,
नाचे ईसा जनूँ छोटा हाथी।
शंगरी हांडे मामा की छोरी,
शौक-शौक में बौली होरी।

चाचा वैसे “सीधा-सादा”,
जेब में रखते हाफ़।
चाची चाह में हाथ तुडारी,
रील बनावै साफ़।

जीजा जी की ठसक निराली,
बातों करते तोल।
कदम-कदम पर समझदारी,
समझें रिश्तों का मोल।

बेबे माहरी समझदार से,
करे अकल की बात,
पढ़ने में भी नंबर वन,
संस्कार भी रहते साथ।

भाई खड़ा हर मोड़ पे,
ढाल बने हर हाल।
भाभी हँसी सहेज के रखै,
सभी का रखती ख्याल।

फूफा जी ज्ञानी भारी,
हर मुद्दे का हल दें गोल।
बुआ पे बात आए जब,
बदल जावै पूरा रोल।

बुआ का छोटला सनी देओल,
दारू में करे फ़ुल रोल,
दिल का छोरा पूरा साफ,
गलती करदयो उसकी माफ़।

साला हीरो चश्मे काले,
हर फोटो में स्टाइल।
साली बोले “सिंपल हूँ”,
फ़िल्टर बदले हर माइल।

मौसी माहरी पोर्टेबल से,
मौसा पूरा हाथी,
कुनबा माहरा घणा से बढ़िया,
सुःख दुःख के सब साथी।

दादी की डांट में कानून,
दादा मौन कमांड।
इन्हीं दोनों के डर से,
सीधा चलता खानदान।

चुटकी ली है जान के थोड़ी,
नियत बिल्कुल गोल।
जिसने दिल पे ले लिया,
उसका नंबर—नेक्स्ट रोल 😈

अनिल आर्य...

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